Yes Bank Has Gone The Pmc Way After Rbi Imposed Moratorium On Withdrawals – क्या Pmc जैसी हो गई है यस बैंक की स्थिति? ग्राहक लगा रहे हैं कोर्ट के चक्कर

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आरबीआई ने अपने नोटिफिकेशन में कहा है कि खाताधारकों को घबराने की जरूरत नहीं है। जल्द ही बैंक के लिए रीस्ट्रक्चरिंग प्लान पेश किया जाएगा और ग्राहकों के पैसों को सुरक्षित किया जाएगा। यानी ग्राहकों का पैसा नहीं डूबेगा। लेकिन ग्राहकों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और इसको पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक पर लगे प्रतिबंध से जोड़ा जा रहा है। पीएमसी में भी ऐसी स्थिति देखने को मिली थी। आरबीआई की ओर से धीरे-धीरे निकासी की लिमिट को बढ़ाया गया था। 23 सितंबर 2019 को आरबीआई ने जब पीएमसी बैंक पर प्रतिबंध लगाया था, तब भी आरबीआई ने ग्राहकों को परेशान न होने को कहा था। लेकिन आज भी पीएमसी बैंक के खाताधारकों को अपना पूरा पैसा वापस नहीं मिला है। 

पिछली महीने सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
पिछली महीने सुप्रीम कोर्ट ने संकट से जूझ रहे पीएमसी बैंक का बकाया चुकाने के लिए रियल एस्टेट कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ( HDIL ) की संपत्तियों को बेचने का निर्देश देने वाले बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। 

कोर्ट ने जारी किया नोटिस
चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने यह फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने सरोज दमानिया सहित को नोटिस जारी किया है, जिन्होंने पीएमसी बैंक खाताधारकों को देय राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

पहले किया था कमेटी का गठन
इससे पहले बकाय के भुगतान के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने तीन सदस्यों की एक कमेटी का गठन किया था, जिसे एचडीआईएल की संपत्तियों की बिक्री के लिए उसका मूल्यांकन करना था।  

23 सितंबर को लगी थी पीएमसी पर रोक
23 सितंबर को भारतीय रिजर्व बैंक ( RBI ) ने छह महीनों तक पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक पर रोक लगा दी थी। इस मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ था। बैंक की आंतरिक जांच टीम ने कहा था कि पीएमसी बैंक के रिकॉर्ड से कुल 10.5 करोड़ रुपये नकद गायब है। 

यह है मामला
जांच में पता चला कि यह घोटाला 6,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। पहले बात सामने आई थी कि यह घोटाला 4,355 करोड़ रुपये का है। मामले में एक सूत्र ने बताया था कि, ‘यह आश्चर्य की बात है कि बैंक की तरफ से बांटे गए कुल कर्ज का दो-तिहाई हिस्सा सिर्फ एक ही कंपनी को दिया गया। उसने कहा कि हो सकता है कि बैंक साल 2008 से ही फर्जीवाड़ा कर रहा है। पिछले 10 सालों से हाउसिंग कंपनी एचडीआईएल को पैसे दिलाने के लिए बैंक ने कईं डमी खाते खोले थे। बैंक के चेयरमैन वरयाम सिंह एचडीआईएल के बोर्ड में शामिल थे। बैंक द्वारा एचडीआईएल को रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन के तौर पर कितना कर्ज दिया गया, इसका खुलासा नहीं किया गया था, जो नियमों के विरुद्ध है।

अगस्त, 2018 से बनी हुई हैं यस बैंक की मुश्किलें
यस बैंक अगस्त, 2018 से ही उतार-चढ़ाव भरे दौर से गुजर रही है, जब रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गवर्नेंस और कर्ज देने के तौर-तरीकों को लेकर चिंताओं के बीच बैंक के तत्कालीन प्रमुख राणा कपूर को 31 जनवरी, 2019 तक पद छोड़ने के लिए कह दिया था। उनके उत्तराधिकारी रवनीत गिल की अगुवाई में बैंक ने बड़ी मात्रा में फंसी संपत्तियों का खुलासा किया था।

यस बैंक ने चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में दो अरब डॉलर जुटाने की योजना बनाई थी। बाद में उसके बोर्ड ने कनाडा के निवेशक एसपीजीपी ग्रुप/अर्विन सिंग ब्रैश द्वारा बैंक में 1.2 अरब डॉलर के निवेश के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

सार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को संकट में फंसे यस बैंक पर मौद्रिक सीमा लगा दी। इसके तहत खाताधारक अब यस बैंक से 50 हजार रुपये से ज्यादा रकम नहीं निकाल सकेंगे। निकासी की यह सीमा 3 अप्रैल, 2020 तक लागू रहेगी।

विस्तार

आरबीआई ने अपने नोटिफिकेशन में कहा है कि खाताधारकों को घबराने की जरूरत नहीं है। जल्द ही बैंक के लिए रीस्ट्रक्चरिंग प्लान पेश किया जाएगा और ग्राहकों के पैसों को सुरक्षित किया जाएगा। यानी ग्राहकों का पैसा नहीं डूबेगा। लेकिन ग्राहकों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और इसको पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक पर लगे प्रतिबंध से जोड़ा जा रहा है। पीएमसी में भी ऐसी स्थिति देखने को मिली थी। आरबीआई की ओर से धीरे-धीरे निकासी की लिमिट को बढ़ाया गया था। 23 सितंबर 2019 को आरबीआई ने जब पीएमसी बैंक पर प्रतिबंध लगाया था, तब भी आरबीआई ने ग्राहकों को परेशान न होने को कहा था। लेकिन आज भी पीएमसी बैंक के खाताधारकों को अपना पूरा पैसा वापस नहीं मिला है। 

पिछली महीने सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
पिछली महीने सुप्रीम कोर्ट ने संकट से जूझ रहे पीएमसी बैंक का बकाया चुकाने के लिए रियल एस्टेट कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ( HDIL ) की संपत्तियों को बेचने का निर्देश देने वाले बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। 

कोर्ट ने जारी किया नोटिस
चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने यह फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने सरोज दमानिया सहित को नोटिस जारी किया है, जिन्होंने पीएमसी बैंक खाताधारकों को देय राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

पहले किया था कमेटी का गठन
इससे पहले बकाय के भुगतान के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने तीन सदस्यों की एक कमेटी का गठन किया था, जिसे एचडीआईएल की संपत्तियों की बिक्री के लिए उसका मूल्यांकन करना था।  

23 सितंबर को लगी थी पीएमसी पर रोक
23 सितंबर को भारतीय रिजर्व बैंक ( RBI ) ने छह महीनों तक पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक पर रोक लगा दी थी। इस मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ था। बैंक की आंतरिक जांच टीम ने कहा था कि पीएमसी बैंक के रिकॉर्ड से कुल 10.5 करोड़ रुपये नकद गायब है। 

यह है मामला
जांच में पता चला कि यह घोटाला 6,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। पहले बात सामने आई थी कि यह घोटाला 4,355 करोड़ रुपये का है। मामले में एक सूत्र ने बताया था कि, ‘यह आश्चर्य की बात है कि बैंक की तरफ से बांटे गए कुल कर्ज का दो-तिहाई हिस्सा सिर्फ एक ही कंपनी को दिया गया। उसने कहा कि हो सकता है कि बैंक साल 2008 से ही फर्जीवाड़ा कर रहा है। पिछले 10 सालों से हाउसिंग कंपनी एचडीआईएल को पैसे दिलाने के लिए बैंक ने कईं डमी खाते खोले थे। बैंक के चेयरमैन वरयाम सिंह एचडीआईएल के बोर्ड में शामिल थे। बैंक द्वारा एचडीआईएल को रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन के तौर पर कितना कर्ज दिया गया, इसका खुलासा नहीं किया गया था, जो नियमों के विरुद्ध है।

अगस्त, 2018 से बनी हुई हैं यस बैंक की मुश्किलें
यस बैंक अगस्त, 2018 से ही उतार-चढ़ाव भरे दौर से गुजर रही है, जब रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गवर्नेंस और कर्ज देने के तौर-तरीकों को लेकर चिंताओं के बीच बैंक के तत्कालीन प्रमुख राणा कपूर को 31 जनवरी, 2019 तक पद छोड़ने के लिए कह दिया था। उनके उत्तराधिकारी रवनीत गिल की अगुवाई में बैंक ने बड़ी मात्रा में फंसी संपत्तियों का खुलासा किया था।

यस बैंक ने चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में दो अरब डॉलर जुटाने की योजना बनाई थी। बाद में उसके बोर्ड ने कनाडा के निवेशक एसपीजीपी ग्रुप/अर्विन सिंग ब्रैश द्वारा बैंक में 1.2 अरब डॉलर के निवेश के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।





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