The Communist Party Of China Reiterated The Principle Of Total Control Over The Military – चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने सेना पर संपूर्ण नियंत्रण के सिद्धांत को दोहराया

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चीन की सेना(फाइल फोटो)
– फोटो : पीटीआई

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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) ने देश की सेना पर संपूर्ण नियंत्रण के सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि जनमुक्ति सेना (पीएलए) को पार्टी के आदेशों का कड़ाई से पालन करना चाहिए क्योंकि बीजिंग, 2027 तक अमेरिका के समान पूर्ण रूप से आधुनिक सेना बनाना चाहता है।

बीस लाख सैनिकों की क्षमता वाली पीएलए विश्व की सबसे बड़ी सेना है। दूसरे देशों में जहां सेना, सरकार के अधीन काम करती है वहीं चीन की सेना कम्युनिस्ट पार्टी के एक अंग के रूप में काम करती है। पार्टी के पोलित ब्यूरो ने सोमवार को कहा कि सेना को उस सिद्धांत को मानना चाहिए जिसके अनुसार सशस्त्र सेनाओं पर पार्टी का संपूर्ण नियंत्रण है।

राष्ट्रपति शी जिनफिंग की अध्यक्षता में सीपीसी के पोलित ब्यूरो की सोमवार को बैठक हुई जिसमें सशस्त्र सेनाओं में राजनीतिक कार्य के नियमन की समीक्षा की गई। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार बैठक के बाद एक वक्तव्य जारी किया गया जिसमें सशस्त्र सेनाओं में राजनीतिक कार्य की समीक्षा की गई।

वर्ष 2012 में सत्ता संभालने के बाद शी, माओत्से तुंग के बाद सबसे शक्तिशाली नेता के तौर पर उभरे हैं और वह लगातार इस पर जोर देते रहे हैं कि पीएलए को सीपीसी के पूर्ण नियंत्रण में काम करना चाहिए।

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) ने देश की सेना पर संपूर्ण नियंत्रण के सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि जनमुक्ति सेना (पीएलए) को पार्टी के आदेशों का कड़ाई से पालन करना चाहिए क्योंकि बीजिंग, 2027 तक अमेरिका के समान पूर्ण रूप से आधुनिक सेना बनाना चाहता है।

बीस लाख सैनिकों की क्षमता वाली पीएलए विश्व की सबसे बड़ी सेना है। दूसरे देशों में जहां सेना, सरकार के अधीन काम करती है वहीं चीन की सेना कम्युनिस्ट पार्टी के एक अंग के रूप में काम करती है। पार्टी के पोलित ब्यूरो ने सोमवार को कहा कि सेना को उस सिद्धांत को मानना चाहिए जिसके अनुसार सशस्त्र सेनाओं पर पार्टी का संपूर्ण नियंत्रण है।

राष्ट्रपति शी जिनफिंग की अध्यक्षता में सीपीसी के पोलित ब्यूरो की सोमवार को बैठक हुई जिसमें सशस्त्र सेनाओं में राजनीतिक कार्य के नियमन की समीक्षा की गई। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार बैठक के बाद एक वक्तव्य जारी किया गया जिसमें सशस्त्र सेनाओं में राजनीतिक कार्य की समीक्षा की गई।

वर्ष 2012 में सत्ता संभालने के बाद शी, माओत्से तुंग के बाद सबसे शक्तिशाली नेता के तौर पर उभरे हैं और वह लगातार इस पर जोर देते रहे हैं कि पीएलए को सीपीसी के पूर्ण नियंत्रण में काम करना चाहिए।



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