Supreme Court Dismissed Devendra Fadnavis Plea Seeking Modification Of Court Earlier Order – देवेंद्र फडणवीस को सुप्रीम कोर्ट से झटका, चुनावी हलफनामे में तथ्य छुपाने पर चलेगा मुकदमा

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 03 Mar 2020 12:28 PM IST

देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो)
– फोटो : ANI

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सुप्रीम कोर्ट से महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मंगलवार को झटका लगा है। देवेंद्र फडणवीस की याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है, अब फडणवीस पर चुनावी हलफनामे में जानकारी छुपाने के आरोप में मुकदमा चलेगा।

इससे पहले 18 फरवरी को देवेंद्र फडणवीस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। फडणवीस पर 2014 के चुनावी हलफनामें में अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का ब्योरा कथित तौर पर नहीं देने पर मुकदमे का सामना करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ के समक्ष फडणवीस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा था कि चुनाव लड़ने वाले अन्य उम्मीदवारों के लिए इस मुद्दे के दूरगामी परिणाम होंगे और न्यायालय को एक अक्टूबर 2019 के अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

न्यायालय ने पिछले साल अपने फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला निरस्त कर दिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में फडणवीस को क्लीन चिट दे दी थी और कहा था कि वह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए) के तहत कथित अपराध पर मुकदमें का सामना करने के हकदार नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट से महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मंगलवार को झटका लगा है। देवेंद्र फडणवीस की याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है, अब फडणवीस पर चुनावी हलफनामे में जानकारी छुपाने के आरोप में मुकदमा चलेगा।

इससे पहले 18 फरवरी को देवेंद्र फडणवीस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। फडणवीस पर 2014 के चुनावी हलफनामें में अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का ब्योरा कथित तौर पर नहीं देने पर मुकदमे का सामना करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ के समक्ष फडणवीस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा था कि चुनाव लड़ने वाले अन्य उम्मीदवारों के लिए इस मुद्दे के दूरगामी परिणाम होंगे और न्यायालय को एक अक्टूबर 2019 के अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

न्यायालय ने पिछले साल अपने फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला निरस्त कर दिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में फडणवीस को क्लीन चिट दे दी थी और कहा था कि वह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए) के तहत कथित अपराध पर मुकदमें का सामना करने के हकदार नहीं हैं।





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