Rajya Sabha: Opposition Had Already Written The Script Of The Ruckus – विपक्ष ने पहले ही लिख ली थी हंगामे की पटकथा, आने वाले विधानसभा चुनावों में मुद्दा बनाना था मकसद

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

Updated Tue, 22 Sep 2020 06:54 AM IST

संसद परिसर में धरना देते आठ निलंबित सांसद
– फोटो : PTI

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विपक्षी दलों ने कृषि संबंधी विधेयकों को लेकर राज्यसभा में हुए हंगामे की पटकथा पहले ही लिख ली थी। बस उसे अमलीजामा रविवार को उच्च सदन में पहनाया गया। इन दलों का मकसद राज्यसभा की कार्यवाही बाधित करने से कहीं अधिक अगले 6 महीनों के अंदर होने वाले बिहार और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के लिए मुद्दा बनाना था।

दरअसल, विपक्षी दलों को मालूम था कि संख्या बल में सत्ता पक्ष से जीत नहीं पाएंगे। भले ही बीजू जनता दल और अकाली दल के विपक्षी गठबंधन के साथ आने से कागज पर वह ज्यादा मजबूत दिख रहा हो लेकिन 65 साल से अधिक उम्र के विपक्षी सांसदों की अनुपस्थिति से वह संख्या बल में सत्ता पक्ष से पीछे था। एक विपक्षी सांसद ने पहले ही अपनी रणनीति की घोषणा कर दी थी। उन्होंने शनिवार रात को ही बता दिया था कि विपक्ष भले ही इन विधेयकों को प्रवर समिति के हवाले करा पाने में विफल रहे लेकिन वह अपना जोरदार विरोध जरूर दर्ज कराएगा। उन्होंने कहा था कि बस आप रविवार को राज्यसभा की कार्यवाही देखिएगा। रविवार को राज्यसभा में जो कुछ भी हुआ, वह उसी योजना के तहत हुआ।

दोपहर एक बजे तक बहस बहुत शांतिपूर्ण तरह से चली। विपक्ष किसी मौके की तलाश कर रहा था जहां वह हंगामा कर सके। दोपहर एक बजे से आगे राज्यसभा की कार्यवाही चलाने के प्रस्ताव ने उन्हें यह मौका दे दिया। इसके बाद जो हुआ वह संसदीय इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। माइक तोड़े गए, रूल बुक फाड़ी गईं, सांसदों को चोटें आईं, मार्शल के साथ हाथापाई की गई और सभापति की आसंदी पर हमला किया गया। सोमवार को विपक्षी दलों द्वारा संसद परिसर में आयोजित धरना और प्रदर्शन का मकसद आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को लोकतंत्र विरोधी करार देना है। धरने में अधिकतर पोस्टर बांग्ला में लिखे होने से उनका ध्येय स्पष्ट हो गया।

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राज्यसभा से पारित कृषि विधेयकों का विरोध कर रहीं गैर एनडीए पार्टियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात का समय मांगा है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस, वाम दलों, एनसीपी, द्रमुक, सपा, तृणमूल कांग्रेस और राजद ने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में उनसे इस मामले में दखल देने की मांग की है। ज्ञापन में राष्ट्रपति से अपील की गई है कि वह इन विधेयकों पर दस्तखत नहीं करें और विधेयकों को वापस राज्यसभा भेज दें।

सरकार के अंतहीन अहंकार ने देश के  लिए आर्थिक संकट ला दिया: राहुल

राज्यसभा से आठ सांसदों के निलंबन पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि लोकतांत्रिक भारत की आवाज को बंद करना जारी है। उन्होंने कहा कि शुरू में इसे शांत किया गया और अब कृषि विधेयक पर चिंता जताने वाले सांसदों को निलंबित कर दिया गया। इस सर्वज्ञ सरकार के अंतहीन अहंकार ने पूरे देश के लिए आर्थिक संकट ला दिया है।

इस अंधियारी रात की सुबह होकर रहेगी। जिस किसान ने देश का पेट भरा हो, उसकी खेती पर भाजपाई हमले के खिलाफ कांग्रेस और विपक्षी दल ढाल बनकर खड़े हैं। हमारे युवा और बहादुर सांसद पूरी रात गांधी जी के चरणों में संसद में बैठे हैं। – रणदीप सिंह सुरजेवाला, प्रवक्ता कांग्रेस

विपक्षी दलों ने कृषि संबंधी विधेयकों को लेकर राज्यसभा में हुए हंगामे की पटकथा पहले ही लिख ली थी। बस उसे अमलीजामा रविवार को उच्च सदन में पहनाया गया। इन दलों का मकसद राज्यसभा की कार्यवाही बाधित करने से कहीं अधिक अगले 6 महीनों के अंदर होने वाले बिहार और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के लिए मुद्दा बनाना था।

दरअसल, विपक्षी दलों को मालूम था कि संख्या बल में सत्ता पक्ष से जीत नहीं पाएंगे। भले ही बीजू जनता दल और अकाली दल के विपक्षी गठबंधन के साथ आने से कागज पर वह ज्यादा मजबूत दिख रहा हो लेकिन 65 साल से अधिक उम्र के विपक्षी सांसदों की अनुपस्थिति से वह संख्या बल में सत्ता पक्ष से पीछे था। एक विपक्षी सांसद ने पहले ही अपनी रणनीति की घोषणा कर दी थी। उन्होंने शनिवार रात को ही बता दिया था कि विपक्ष भले ही इन विधेयकों को प्रवर समिति के हवाले करा पाने में विफल रहे लेकिन वह अपना जोरदार विरोध जरूर दर्ज कराएगा। उन्होंने कहा था कि बस आप रविवार को राज्यसभा की कार्यवाही देखिएगा। रविवार को राज्यसभा में जो कुछ भी हुआ, वह उसी योजना के तहत हुआ।

दोपहर एक बजे तक बहस बहुत शांतिपूर्ण तरह से चली। विपक्ष किसी मौके की तलाश कर रहा था जहां वह हंगामा कर सके। दोपहर एक बजे से आगे राज्यसभा की कार्यवाही चलाने के प्रस्ताव ने उन्हें यह मौका दे दिया। इसके बाद जो हुआ वह संसदीय इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। माइक तोड़े गए, रूल बुक फाड़ी गईं, सांसदों को चोटें आईं, मार्शल के साथ हाथापाई की गई और सभापति की आसंदी पर हमला किया गया। सोमवार को विपक्षी दलों द्वारा संसद परिसर में आयोजित धरना और प्रदर्शन का मकसद आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को लोकतंत्र विरोधी करार देना है। धरने में अधिकतर पोस्टर बांग्ला में लिखे होने से उनका ध्येय स्पष्ट हो गया।

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राज्यसभा से पारित कृषि विधेयकों का विरोध कर रहीं गैर एनडीए पार्टियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात का समय मांगा है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस, वाम दलों, एनसीपी, द्रमुक, सपा, तृणमूल कांग्रेस और राजद ने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में उनसे इस मामले में दखल देने की मांग की है। ज्ञापन में राष्ट्रपति से अपील की गई है कि वह इन विधेयकों पर दस्तखत नहीं करें और विधेयकों को वापस राज्यसभा भेज दें।

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राज्यसभा से आठ सांसदों के निलंबन पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि लोकतांत्रिक भारत की आवाज को बंद करना जारी है। उन्होंने कहा कि शुरू में इसे शांत किया गया और अब कृषि विधेयक पर चिंता जताने वाले सांसदों को निलंबित कर दिया गया। इस सर्वज्ञ सरकार के अंतहीन अहंकार ने पूरे देश के लिए आर्थिक संकट ला दिया है।

इस अंधियारी रात की सुबह होकर रहेगी। जिस किसान ने देश का पेट भरा हो, उसकी खेती पर भाजपाई हमले के खिलाफ कांग्रेस और विपक्षी दल ढाल बनकर खड़े हैं। हमारे युवा और बहादुर सांसद पूरी रात गांधी जी के चरणों में संसद में बैठे हैं। – रणदीप सिंह सुरजेवाला, प्रवक्ता कांग्रेस



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