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Vikas Dubey Arrested In Ujjain: Vikas Confessed These Big Things In Police Inquiry – विकास दुबे का कबूलनामा, महाकाल की शरण में आने के बाद फूट-फूटकर रोया, बोला- मुझे किए पर अफसोस है

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गिरफ्तार किया गया विकास दुबे

गिरफ्तार किया गया विकास दुबे
– फोटो : अमर उजाला

उज्जैन में विकास दुबे गिरफ्तार

उज्जैन में विकास दुबे गिरफ्तार
– फोटो : अमर उजाला

गिरफ्तार किया गया विकास दुबे

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– फोटो : अमर उजाला

गिरफ्तार किया गया विकास दुबे

गिरफ्तार किया गया विकास दुबे
– फोटो : ani

विकास दुबे

विकास दुबे
– फोटो : अमर उजाल ा



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Misdeed With 12 Years Old Boy In Punjab’s Ludhiana – शर्मनाक: दो युवकों ने 12 साल के बच्चे के साथ किया कुकर्म, वीडियो बना मां को व्हाट्सएप किया

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संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
Updated Thu, 09 Jul 2020 09:35 PM IST

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पंजाब के लुधियाना में बेहद शर्मसार करने वाली वारदात सामने आई है। यहां 12 साल के एक बच्चे के साथ दो युवकों ने खेत में ले जाकर कुकर्म किया। इतना ही नहीं आरोपियों ने उसका वीडियो भी बना डाला और इस वीडियो को पीड़ित बच्चे की मां के नंबर पर व्हाट्सअप कर दिया। जिसके बाद मां ने अपने बेटे से घटना के बारे में पूछा और इसकी जानकारी पुलिस को दी। 

जांच अधिकारी इंस्पेक्टर बलजीत सिंह ने बताया कि बच्चा छठी कक्षा का छात्र है। बुधवार को वह इलाके में ही किसी काम से जा रहा था। इसी दौरान दोनों आरोपी बहला-फुसला कर उसे खेत में लेकर गए। वहां आरोपियों ने बारी-बारी से कुकर्म किया और उसका वीडियो भी बना लिया।

इसी दौरान बच्चे की मां मोबाइल फोन पर धार्मिक भजन सुन रही थी तो उसे व्हाट्सअप पर एक नंबर से वीडियो आया। जिसमें दोनों आरोपी बच्चे के साथ गलत काम कर रहे थे। इसके बाद बच्चे की मां ने उससे पूछताछ की तो बच्चे ने सारी बात बताई। मां ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस बच्चे की मेडिकल जांच की तैयारी कर रही है।

पंजाब के लुधियाना में बेहद शर्मसार करने वाली वारदात सामने आई है। यहां 12 साल के एक बच्चे के साथ दो युवकों ने खेत में ले जाकर कुकर्म किया। इतना ही नहीं आरोपियों ने उसका वीडियो भी बना डाला और इस वीडियो को पीड़ित बच्चे की मां के नंबर पर व्हाट्सअप कर दिया। जिसके बाद मां ने अपने बेटे से घटना के बारे में पूछा और इसकी जानकारी पुलिस को दी। 

जांच अधिकारी इंस्पेक्टर बलजीत सिंह ने बताया कि बच्चा छठी कक्षा का छात्र है। बुधवार को वह इलाके में ही किसी काम से जा रहा था। इसी दौरान दोनों आरोपी बहला-फुसला कर उसे खेत में लेकर गए। वहां आरोपियों ने बारी-बारी से कुकर्म किया और उसका वीडियो भी बना लिया।

इसी दौरान बच्चे की मां मोबाइल फोन पर धार्मिक भजन सुन रही थी तो उसे व्हाट्सअप पर एक नंबर से वीडियो आया। जिसमें दोनों आरोपी बच्चे के साथ गलत काम कर रहे थे। इसके बाद बच्चे की मां ने उससे पूछताछ की तो बच्चे ने सारी बात बताई। मां ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस बच्चे की मेडिकल जांच की तैयारी कर रही है।



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Lockdown In Up From Tomorrow Know What Will Open And What Will Remain Closed – आज से यूपी में लॉकडाउन, जानिए क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 10 Jul 2020 12:07 AM IST

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उत्तर प्रदेश में एक बार फिर योगी सरकार ने संपूर्ण लॉकडाउन जैसी स्थिति लागू करने का फैसला किया है। प्रदेश में शुक्रवार रात 10 बजे से 13 जुलाई सुबह पांच बजे तक संपूर्ण लॉकडाउन लागू करने एलान हुआ है। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि प्रदेश में कोविड-19 की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है लोगों को जागरुक करने के लिए लॉकडाउन किया जाएगा।

राज्य में तेजी बढ़ते कोरोना के मरीजों की संख्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला किया है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्र में स्थित औद्योगिक कारखाने खुले रहेंगे। शहरी क्षेत्र में निरंतर चालू रहने वाले औद्योगिक कारखानों को छोड़कर सभी बंद रहेंगे। यहां भी सोशल डिस्टेंसिंग की नियमों का पालन करना जरूरी होगा।

  • लॉकडाउन के दौरान मालवाहक वाहनों के आवागमन पर कोई प्रतिबंध नहीं।
  • रेलवे की सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी।
  • अस्पताल और अन्य जरूरी सामान की दुकानें खुलेंगी।
  • रेल से आने-जाने वाले व्यक्तियों के लिए बस की व्यवस्था राज्य सरकार करेगी।
  • कार्यालय, शहरी व ग्रामीण हाट, बाजार, गल्ला मंडी, और व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे। 
  • आवश्यक सेवाओं वाले व्यक्तियों, कोरोना वॉरियर, स्वच्छताकर्मी व डोर स्टेप डिलीवरी से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध नहीं।
  • पूरे राज्य में यूपी रोडवेज की सेवाएं बंद रहेंगी।
  • अंतरराष्ट्रीय और घरेलू विमान सेवा पर रोक नहीं। 
  • हवाई अड्डा से आने-जाने वालों पर भी प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
  • राज्यमार्गों के किनारे ढाबे और पेट्रोल पंप भी खुले रहेंगे।
  • एक्सप्रेस वे, बड़े पुल और सड़कों से जुड़े सभी निर्माण कार्य जारी रहेंगे।
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर योगी सरकार ने संपूर्ण लॉकडाउन जैसी स्थिति लागू करने का फैसला किया है। प्रदेश में शुक्रवार रात 10 बजे से 13 जुलाई सुबह पांच बजे तक संपूर्ण लॉकडाउन लागू करने एलान हुआ है। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि प्रदेश में कोविड-19 की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है लोगों को जागरुक करने के लिए लॉकडाउन किया जाएगा।

राज्य में तेजी बढ़ते कोरोना के मरीजों की संख्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला किया है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्र में स्थित औद्योगिक कारखाने खुले रहेंगे। शहरी क्षेत्र में निरंतर चालू रहने वाले औद्योगिक कारखानों को छोड़कर सभी बंद रहेंगे। यहां भी सोशल डिस्टेंसिंग की नियमों का पालन करना जरूरी होगा।


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जानिए क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद



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Bcci Ceo Rahul Johris Resignation Accepted – बीसीसीआई ने सीईओ राहुल जौहरी का इस्तीफा स्वीकार किया

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स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 09 Jul 2020 10:46 PM IST

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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) राहुल जौहरी का इस्तीफा लंबे समय बाद गुरुवार को स्वीकार कर लिया गया। 

इस मामले में बीसीसीआई के एक दिग्गज ने नाम न छापने के शर्त पर बताया, ‘राहुल जौहरी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। पहले उन्हें 30 अप्रैल तक का समय दिया गया था, लेकिन इस बार इसे स्वीकार कर लिया गया है।’ जौहरी ने 27 दिसंबर को इस्तीफा दिया था। यह पता नहीं चल सका है कि बोर्ड ने अचानक इस्तीफा स्वीकार करने का फैसला क्यों किया?

वह 2016 में इस पद पर बैठने वाले पहले व्यक्ति थे और उनका कार्यकाल फरवरी 2021 तक था। सौरव गांगुली के बोर्ड अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने त्यागपत्र दे दिया था। बता दें कि राहुल जौहरी की नियुक्ति 2016 में शशांक मनोहर के अध्यक्ष रहते हुई थी। उस वक्त अनुराग ठाकुर सचिव थे।

जौहरी इससे पहले डिस्कवरी नेटवर्क एशिया पैसेफिक के कार्यकारी उपाध्यक्ष और साउथ एशिया के महाप्रबंधक के रूप में कार्यकर चुके हैं।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) राहुल जौहरी का इस्तीफा लंबे समय बाद गुरुवार को स्वीकार कर लिया गया। 

इस मामले में बीसीसीआई के एक दिग्गज ने नाम न छापने के शर्त पर बताया, ‘राहुल जौहरी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। पहले उन्हें 30 अप्रैल तक का समय दिया गया था, लेकिन इस बार इसे स्वीकार कर लिया गया है।’ जौहरी ने 27 दिसंबर को इस्तीफा दिया था। यह पता नहीं चल सका है कि बोर्ड ने अचानक इस्तीफा स्वीकार करने का फैसला क्यों किया?

वह 2016 में इस पद पर बैठने वाले पहले व्यक्ति थे और उनका कार्यकाल फरवरी 2021 तक था। सौरव गांगुली के बोर्ड अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने त्यागपत्र दे दिया था। बता दें कि राहुल जौहरी की नियुक्ति 2016 में शशांक मनोहर के अध्यक्ष रहते हुई थी। उस वक्त अनुराग ठाकुर सचिव थे।

जौहरी इससे पहले डिस्कवरी नेटवर्क एशिया पैसेफिक के कार्यकारी उपाध्यक्ष और साउथ एशिया के महाप्रबंधक के रूप में कार्यकर चुके हैं।



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Opinion Of Experts On Cbse Decision Of Syllabus Reduction Which Is Being Accused Of Running Political Agenda – सीबीएसई के सिलेबस कट में भी राजनीतिक एजेंडा चलाने का आरोप, क्या कहते हैं विशेषज्ञ

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कोरोना काल में कक्षाओं के न चलने से छात्रों का काफी नुकसान हुआ है। परीक्षा परिणामों पर इसका असर न पड़े, इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश पर सीबीएसई ने पाठ्यक्रम में 30 फीसदी तक की कटौती कर दी है। लेकिन इस पर कई राजनीतिक दलों की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। 

तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नागरिकता और संघवाद जैसे महत्त्वपूर्ण टॉपिक को सिलेबस से हटाए जाने पर हैरानी जताई है। उन्होंने इस फैसले का विरोध करते हुए इस पर पुनर्विचार करने को कहा है। वहीं आम आदमी पार्टी ने इसे भाजपा का ‘राजनीतिक एजेंडा’ कहा है। 

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने अमर उजाला से कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मामला है कि सिलेबस से उन्हीं मुद्दों को हटाया गया है जिनके लिए समूचा विपक्ष लगातार लड़ाई लड़ रहा है। देश के हालात देखते हुए संघवाद, राष्ट्रवाद, नागरिकता और धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दों को युवाओं को इस समय और अधिक समझने की जरूरत है, लेकिन सरकार इन्हीं मुद्दों को इस समय सिलेबस से हटा रही है। इससे उसकी मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। 

हर चीज को राजनीतिक चश्मे से न देखे विपक्ष 

वहीं, भाजपा नेता सुदेश वर्मा ने कहा है कि विपक्ष को हर चीज को राजनीतिक नजरिये से नहीं देखना चाहिए। आपात स्थिति को देखते हुए यह परिवर्तन केवल एक वर्ष के लिए किया गया है। इस समय विपक्ष को देश को आगे बढ़ाने पर सकारात्मक सहयोग देना चाहिए और उसे छात्रों के विषय पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सेकुलरिज्म इस देश के रक्त में है और जब इस तरह के पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाए जाते थे तब भी यह देश सेकुलर था और आगे भी रहेगा। 

पाठ्यक्रम निर्धारण बेहद तकनीकी विषय 

लेडी इरविन कॉलेज में डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन की विभागाध्यक्ष एसोसिएट प्रोफेसर रेनू मालवीय ने कहा कि किसी कक्षा के किसी विषय के पाठ्यक्रम का निर्धारण सामान्य प्रक्रिया नहीं है। छात्रों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों की कमेटी कई बार की बैठकों के बाद इसका स्वरूप, विषय और तरीके पर फैसला करती है। सिलेबस में कटौती इस समय की मांग है, लेकिन ऐसा करने के दौरान भी पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। 

इसमें भी सभी तकनीकी चीजों का ध्यान रखा जाता तो इससे छात्रों का नुकसान कम से कम होता। लेकिन आनन-फानन में किया गया फैसला छात्रों के लिए ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है। जहां तक पाठ्यक्रम के कम होने से छात्रों पर पड़ने वाले नुकसान की बात है, उसका असर छात्रों पर अवश्य पड़ेगा। विज्ञान जैसे विषयों में अगली कक्षाओं में विषय को समझने के साथ-साथ अन्य मामलों से भी छात्रों पर विषयवस्तु की कमी का असर पड़ता है। 

छात्रों में विषय की समझ पर पड़ेगा असर 

एनसीईआरटी से जुड़ीं शिक्षाविद प्रीती खन्ना ने कहा कि सिलेबस कट कहने के नाम पर 30 फीसदी हुआ है, लेकिन ज्यादातर मामलों में कहा जा रहा है कि असाइनमेंट और कुछ एक्टिविटीज के जरिए इसे पूरा कर दिया जाएगा। इसके आलावा, इकोनॉमिक्स, माइक्रोइकोनॉमिक्स जैसे तकनीकी विषयों में विषयवस्तु की कमी का असर छात्रों को भविष्य में नुकसान के रूप में देखना पड़ सकता है। 

सार

  • सीबीएसई के सिलेबस कट के फैसले को सही मानते हैं विशेषज्ञ
  • लेकिन उचित प्रक्रिया के तहत चाहते हैं पाठ्यक्रम में हो कटौती     
  • सीबीएसई ने पाठ्यक्रम में 30 फीसदी तक की कटौती कर दी है

विस्तार

कोरोना काल में कक्षाओं के न चलने से छात्रों का काफी नुकसान हुआ है। परीक्षा परिणामों पर इसका असर न पड़े, इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश पर सीबीएसई ने पाठ्यक्रम में 30 फीसदी तक की कटौती कर दी है। लेकिन इस पर कई राजनीतिक दलों की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। 

तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नागरिकता और संघवाद जैसे महत्त्वपूर्ण टॉपिक को सिलेबस से हटाए जाने पर हैरानी जताई है। उन्होंने इस फैसले का विरोध करते हुए इस पर पुनर्विचार करने को कहा है। वहीं आम आदमी पार्टी ने इसे भाजपा का ‘राजनीतिक एजेंडा’ कहा है। 

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने अमर उजाला से कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मामला है कि सिलेबस से उन्हीं मुद्दों को हटाया गया है जिनके लिए समूचा विपक्ष लगातार लड़ाई लड़ रहा है। देश के हालात देखते हुए संघवाद, राष्ट्रवाद, नागरिकता और धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दों को युवाओं को इस समय और अधिक समझने की जरूरत है, लेकिन सरकार इन्हीं मुद्दों को इस समय सिलेबस से हटा रही है। इससे उसकी मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। 

हर चीज को राजनीतिक चश्मे से न देखे विपक्ष 

वहीं, भाजपा नेता सुदेश वर्मा ने कहा है कि विपक्ष को हर चीज को राजनीतिक नजरिये से नहीं देखना चाहिए। आपात स्थिति को देखते हुए यह परिवर्तन केवल एक वर्ष के लिए किया गया है। इस समय विपक्ष को देश को आगे बढ़ाने पर सकारात्मक सहयोग देना चाहिए और उसे छात्रों के विषय पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सेकुलरिज्म इस देश के रक्त में है और जब इस तरह के पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाए जाते थे तब भी यह देश सेकुलर था और आगे भी रहेगा। 

पाठ्यक्रम निर्धारण बेहद तकनीकी विषय 

लेडी इरविन कॉलेज में डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन की विभागाध्यक्ष एसोसिएट प्रोफेसर रेनू मालवीय ने कहा कि किसी कक्षा के किसी विषय के पाठ्यक्रम का निर्धारण सामान्य प्रक्रिया नहीं है। छात्रों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों की कमेटी कई बार की बैठकों के बाद इसका स्वरूप, विषय और तरीके पर फैसला करती है। सिलेबस में कटौती इस समय की मांग है, लेकिन ऐसा करने के दौरान भी पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। 

इसमें भी सभी तकनीकी चीजों का ध्यान रखा जाता तो इससे छात्रों का नुकसान कम से कम होता। लेकिन आनन-फानन में किया गया फैसला छात्रों के लिए ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है। जहां तक पाठ्यक्रम के कम होने से छात्रों पर पड़ने वाले नुकसान की बात है, उसका असर छात्रों पर अवश्य पड़ेगा। विज्ञान जैसे विषयों में अगली कक्षाओं में विषय को समझने के साथ-साथ अन्य मामलों से भी छात्रों पर विषयवस्तु की कमी का असर पड़ता है। 

छात्रों में विषय की समझ पर पड़ेगा असर 

एनसीईआरटी से जुड़ीं शिक्षाविद प्रीती खन्ना ने कहा कि सिलेबस कट कहने के नाम पर 30 फीसदी हुआ है, लेकिन ज्यादातर मामलों में कहा जा रहा है कि असाइनमेंट और कुछ एक्टिविटीज के जरिए इसे पूरा कर दिया जाएगा। इसके आलावा, इकोनॉमिक्स, माइक्रोइकोनॉमिक्स जैसे तकनीकी विषयों में विषयवस्तु की कमी का असर छात्रों को भविष्य में नुकसान के रूप में देखना पड़ सकता है। 



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Coronavirus In Delhi 2187 New Cases 45 Death Total Tally Reaches To 107051 – दिल्ली में कोरोना के 2187 नए मामले, 45 की मौत, कुल संक्रमित 107051

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 09 Jul 2020 09:04 PM IST

दिल्ली में कोरोना वायरस
– फोटो : PTI

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दिल्ली में गुरुवार को कोरोना वायरस के 2187 नए मामले सामने आए हैं। जबकि 45 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी के साथ कुल संक्रमितों की संख्या 107051 हो गई है। इस बीच 4027 लोगों को डिस्चार्ज किया गया है। अब तक दिल्ली में 82226 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। कोरोना वायरस से अब तक राजधानी में कोरोना वायरस से 3258 लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली में अभी 21567 सक्रिय मामले हैं।
 

दिल्ली सरकार ने जानकारी दी कि गुरुवार को 9719 आरटी-पीसीआर और 12570 रैपिड एंटीजन जांच की गई। अब तक राजधानी में कुल 724148 कोरोना जांच की गई हैं। 

कोविड-19 से मौतें कम करने की रणनीति बनाएगी दिल्ली सरकार

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वास्थ्य सचिव से कोविड-19 से हुई मौतों की वजह की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसका विश्लेषण कर दिल्ली सरकार मौतों को कम करने पर रणनीति तैयार करेगी। स्वास्थ्य सचिव ने आश्वस्त किया है कि वह जल्द से जल्द रिपोर्ट मुख्यमंत्री के सामने पेश करेंगे। सरकार की कोशिश है कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाकर मौतों को न्यूनतम किया जाए।

अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह पिछले दो सप्ताह में कोविड-19 से हुई मौतों का विस्तृत ब्योरा तैयार करें। इसमें संक्रमण से हुई हर एक मौत के पीछे की वजह की छोटी से छोटी जानकारी शामिल करनी होगी। वहीं, चिकित्सकों की सलाह पर मौतों को कम करने के तरीके भी स्वास्थ्य सचिव को बताने होंगे।

अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार हरसंभव इंतजाम करेगी, जिससे कोविड-19 से होने वाली मौतों की संख्या को कम किया जा सके। कोशिश मौतों की संख्या को शून्य लाने की है। गौरतलब है कि कोरोना के चरम पर होने के दौरान जून में हर दिन मौतों की संख्या 100 से ज्यादा थी। इस वक्त काफी हद तक काबू में है। वहीं, नए मरीजों की संख्या में भी गिरावट आई है।

दिल्ली में गुरुवार को कोरोना वायरस के 2187 नए मामले सामने आए हैं। जबकि 45 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी के साथ कुल संक्रमितों की संख्या 107051 हो गई है। इस बीच 4027 लोगों को डिस्चार्ज किया गया है। अब तक दिल्ली में 82226 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। कोरोना वायरस से अब तक राजधानी में कोरोना वायरस से 3258 लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली में अभी 21567 सक्रिय मामले हैं।

 

दिल्ली सरकार ने जानकारी दी कि गुरुवार को 9719 आरटी-पीसीआर और 12570 रैपिड एंटीजन जांच की गई। अब तक राजधानी में कुल 724148 कोरोना जांच की गई हैं। 

कोविड-19 से मौतें कम करने की रणनीति बनाएगी दिल्ली सरकार

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वास्थ्य सचिव से कोविड-19 से हुई मौतों की वजह की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसका विश्लेषण कर दिल्ली सरकार मौतों को कम करने पर रणनीति तैयार करेगी। स्वास्थ्य सचिव ने आश्वस्त किया है कि वह जल्द से जल्द रिपोर्ट मुख्यमंत्री के सामने पेश करेंगे। सरकार की कोशिश है कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाकर मौतों को न्यूनतम किया जाए।

अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह पिछले दो सप्ताह में कोविड-19 से हुई मौतों का विस्तृत ब्योरा तैयार करें। इसमें संक्रमण से हुई हर एक मौत के पीछे की वजह की छोटी से छोटी जानकारी शामिल करनी होगी। वहीं, चिकित्सकों की सलाह पर मौतों को कम करने के तरीके भी स्वास्थ्य सचिव को बताने होंगे।

अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार हरसंभव इंतजाम करेगी, जिससे कोविड-19 से होने वाली मौतों की संख्या को कम किया जा सके। कोशिश मौतों की संख्या को शून्य लाने की है। गौरतलब है कि कोरोना के चरम पर होने के दौरान जून में हर दिन मौतों की संख्या 100 से ज्यादा थी। इस वक्त काफी हद तक काबू में है। वहीं, नए मरीजों की संख्या में भी गिरावट आई है।





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Full Lockdown In Up From Friday Night To 13 July Till 5 Am – यूपी में शुक्रवार रात 10 बजे से 13 जुलाई सुबह पांच बजे तक संपूर्ण लॉकडाउन, बाजार-दफ्तर सब रहेंगे बंद

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 09 Jul 2020 09:33 PM IST

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उत्तर प्रदेश में एक बार फिर योगी सरकार ने संपूर्ण लॉकडाउन लागू करने का फैसला किया है। प्रदेश में शुक्रवार रात 10 बजे से 13 जुलाई सुबह पांच बजे तक संपूर्ण लॉकडाउन लागू करने की घोषणा की है। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि प्रदेश में कोविड-19 की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है लोगों को जागरुक करने के लिए चार दिन का संपूर्ण लॉकडाउन किया जाएगा। 
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर योगी सरकार ने संपूर्ण लॉकडाउन लागू करने का फैसला किया है। प्रदेश में शुक्रवार रात 10 बजे से 13 जुलाई सुबह पांच बजे तक संपूर्ण लॉकडाउन लागू करने की घोषणा की है। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि प्रदेश में कोविड-19 की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है लोगों को जागरुक करने के लिए चार दिन का संपूर्ण लॉकडाउन किया जाएगा। 





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Pm Modi Will Dedicate To The Nation The 750 Mw Solar Project Set Up At Rewa Madhya Pradesh Tomorrow – पीएम मोदी कल देश को समर्पित करेंगे एशिया की सबसे बड़ी सौर परियोजना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 09 Jul 2020 09:15 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
– फोटो : ANI

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को मध्यप्रदेश में स्थापित रीवा अल्ट्रा मेगा सौर परियोजना का वीडियो कांफ्रेंस के द्वारा लोकार्पण करेंगे। पीएम मोदी जिस परियोजना को कल सुबह 11 बजे राष्ट्र को समर्पित करेंगे, वह एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना है। इसकी क्षमता 750 मेगावाट है। पीएम मोदी ने ट्टीट कर इसकी जानकारी दी है।

पीएम मोदी ने लिखा, कल सुबह 11 बजे मैं वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रीवा, मध्यप्रदेश में 750 मेगावाट की सौर परियोजना का उद्घाटन करूंगा। यह परियोजना 2022 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की हमारी प्रतिबद्धता को गति प्रदान करती है। 

इस परियोजना में एक सौर पार्क के अंदर स्थित 500 हेक्टेयर भूमि पर 250 मेगावाट की तीन सौर उत्पादन इकाइयां शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को मध्यप्रदेश में स्थापित रीवा अल्ट्रा मेगा सौर परियोजना का वीडियो कांफ्रेंस के द्वारा लोकार्पण करेंगे। पीएम मोदी जिस परियोजना को कल सुबह 11 बजे राष्ट्र को समर्पित करेंगे, वह एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना है। इसकी क्षमता 750 मेगावाट है। पीएम मोदी ने ट्टीट कर इसकी जानकारी दी है।

पीएम मोदी ने लिखा, कल सुबह 11 बजे मैं वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रीवा, मध्यप्रदेश में 750 मेगावाट की सौर परियोजना का उद्घाटन करूंगा। यह परियोजना 2022 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की हमारी प्रतिबद्धता को गति प्रदान करती है। 

इस परियोजना में एक सौर पार्क के अंदर स्थित 500 हेक्टेयर भूमि पर 250 मेगावाट की तीन सौर उत्पादन इकाइयां शामिल हैं।





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Fear Of Escape Of Banks Haunting China, Ban On Large Cash Withdrawals – चीन को सता रहा बैंकों के भागने का डर, बड़ी नकदी निकासी पर लगाई रोक

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Updated Thu, 09 Jul 2020 08:35 PM IST

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चीन में कोरोना के दोबारे पैर पसारने की ख़बरों के बीच अब वहां पर बैंक और अर्थव्यवस्ता को लेकर हड़कंप मचा है। यहां पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने बिना पूर्वानुमति के बड़ी मात्रा में नकदी निकालने पर रोक लगाने का फैसला किया है। कर्जदारों के ऋण के डूब जाने और बैंकों के भाग जाने के डर से अब चीन ने बैंकों से बड़ी राशि की निकासी पर रोक लगाने की घोषणा की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने बैंक के भाग जाने के डर और कोरोनो महामारी के मद्देनजर गैर-निष्पादित संपत्तियों की बढ़ती संख्या के बीच नकदी निकासी पर सख्त अंकुश लगाया है। प्रतिबंधों को चीन के हेबेई प्रांत में एक पायलट परियोजना के रूप में लगाया गया है और बाद में अक्टूबर में दो और क्षेत्रों, झेजियांग और शेन्ज़ेन में लागू किया जाएगा।

इन तीनों प्रांतों के लगभग 70,00,000 लोग नकदी वापसी प्रतिबंधों के कारण प्रभावित होंगे। सरकारी एजेंसियों के अनुसार, स्थानीय सरकारों, पुलिस और बैंकों द्वारा बड़ी संख्या में लोगों को बैंक से पैसा निकालने के लिए राजी करने में विफल रहने के बाद इन प्रतिबंधों की घोषणा की गई थी।

समाचार एजेंसी ने बताया कि पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने कहा कि इस कदम से टबड़ी मात्रा में नकदी की अनुचित मांगें” बरकरार रहेंगी, जबकि नियामक यह सुनिश्चित करेगा कि बड़े लेनदेन के लिए लोगों की सामान्य जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए।

इस दो वर्षीय परियोजना के तहत, व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए नकद निकासी पर सीमाएं लगाई गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1,000-300,000 युआन और 500,000 युआन से अधिक के कारोबार को वापस लेने वाले व्यक्तियों को पूर्व सरकार की मंजूरी की आवश्यकता होगी।

कथित तौर पर यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि लोग को यह डर सता रहा है कि बड़े कर्जों के डूबे बैंक उनकी जमापूंजी को लेकर भाग सकते हैं। यही कारण है कि लोग तेजी से अधिक मात्रा में बैंकों से अपने पैसों की निकासी कर रहे हैं।

चीन में कोरोना के दोबारे पैर पसारने की ख़बरों के बीच अब वहां पर बैंक और अर्थव्यवस्ता को लेकर हड़कंप मचा है। यहां पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने बिना पूर्वानुमति के बड़ी मात्रा में नकदी निकालने पर रोक लगाने का फैसला किया है। कर्जदारों के ऋण के डूब जाने और बैंकों के भाग जाने के डर से अब चीन ने बैंकों से बड़ी राशि की निकासी पर रोक लगाने की घोषणा की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने बैंक के भाग जाने के डर और कोरोनो महामारी के मद्देनजर गैर-निष्पादित संपत्तियों की बढ़ती संख्या के बीच नकदी निकासी पर सख्त अंकुश लगाया है। प्रतिबंधों को चीन के हेबेई प्रांत में एक पायलट परियोजना के रूप में लगाया गया है और बाद में अक्टूबर में दो और क्षेत्रों, झेजियांग और शेन्ज़ेन में लागू किया जाएगा।

इन तीनों प्रांतों के लगभग 70,00,000 लोग नकदी वापसी प्रतिबंधों के कारण प्रभावित होंगे। सरकारी एजेंसियों के अनुसार, स्थानीय सरकारों, पुलिस और बैंकों द्वारा बड़ी संख्या में लोगों को बैंक से पैसा निकालने के लिए राजी करने में विफल रहने के बाद इन प्रतिबंधों की घोषणा की गई थी।

समाचार एजेंसी ने बताया कि पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने कहा कि इस कदम से टबड़ी मात्रा में नकदी की अनुचित मांगें” बरकरार रहेंगी, जबकि नियामक यह सुनिश्चित करेगा कि बड़े लेनदेन के लिए लोगों की सामान्य जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए।

इस दो वर्षीय परियोजना के तहत, व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए नकद निकासी पर सीमाएं लगाई गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1,000-300,000 युआन और 500,000 युआन से अधिक के कारोबार को वापस लेने वाले व्यक्तियों को पूर्व सरकार की मंजूरी की आवश्यकता होगी।

कथित तौर पर यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि लोग को यह डर सता रहा है कि बड़े कर्जों के डूबे बैंक उनकी जमापूंजी को लेकर भाग सकते हैं। यही कारण है कि लोग तेजी से अधिक मात्रा में बैंकों से अपने पैसों की निकासी कर रहे हैं।



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Baseless Propaganda By Indian Media Against Nepal Govt And Our Pm Has Crossed All Limits Said Narayan Kaji Shrestha – नेपाल में भारतीय न्यूज चैनलों के प्रसारण पर रोक, सत्तारूढ़ पार्टी के प्रवक्ता ने लगाए गंभीर आरोप

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
Updated Thu, 09 Jul 2020 08:38 PM IST

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भारत और नेपाल के बीच जारी उथल-पुथल के बीच भारतीय समाचार चैनलों के प्रसारण रोका दिया गया है। नेपाल के केबल टीवी प्रोवाइडर ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि देश में भारतीय समाचार चैनलों के सिग्नल को बंद कर दिया गया है। हालांकि, अभी तक नेपाल सरकार की तरफ से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। 

नेपाल में सियासी संकट गंभीर होती जा रही है। नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के भीतर पैदा हुए मतभेद समाप्त होते नहीं दिख रहे हैं। नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ ने कहा कि नेपाल सरकार और हमारे पीएम के खिलाफ भारतीय मीडिया द्वारा आधारहीन प्रचार ने सारी हदें पार कर दी हैं। यह बहुत ज्यादा हो रहा है। बकवास बंद करो।

गुरुवार को आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के बीच अभी तक सहमती नहीं बन पाई है। कहा जा रहा है कि दोनों के बीच सप्ताह भर में आधा दर्जन से अधिक बैठकें हुई हैं।

हाल ही में प्रधानमंत्री ओली ने खुलेआम एक समारोह में कहा था कि एक होटल में बैठकर कुछ भारतीय ताकतें उन्हें कमजोर करने और हटाने की साजिश रच रही हैं।
इसके बाद से उन्हीं की पार्टी के तमाम नेता उनके खिलाफ बोलने लगे थे। इससे पहले से भी पार्टी के सह अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड और माधव नेपाल जैसे तमाम नेता ओली विरोधी मुहिम खुलकर चला रहे थे।

भारत और नेपाल के बीच जारी उथल-पुथल के बीच भारतीय समाचार चैनलों के प्रसारण रोका दिया गया है। नेपाल के केबल टीवी प्रोवाइडर ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि देश में भारतीय समाचार चैनलों के सिग्नल को बंद कर दिया गया है। हालांकि, अभी तक नेपाल सरकार की तरफ से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। 

नेपाल में सियासी संकट गंभीर होती जा रही है। नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के भीतर पैदा हुए मतभेद समाप्त होते नहीं दिख रहे हैं। नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ ने कहा कि नेपाल सरकार और हमारे पीएम के खिलाफ भारतीय मीडिया द्वारा आधारहीन प्रचार ने सारी हदें पार कर दी हैं। यह बहुत ज्यादा हो रहा है। बकवास बंद करो।

गुरुवार को आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के बीच अभी तक सहमती नहीं बन पाई है। कहा जा रहा है कि दोनों के बीच सप्ताह भर में आधा दर्जन से अधिक बैठकें हुई हैं।

हाल ही में प्रधानमंत्री ओली ने खुलेआम एक समारोह में कहा था कि एक होटल में बैठकर कुछ भारतीय ताकतें उन्हें कमजोर करने और हटाने की साजिश रच रही हैं।
इसके बाद से उन्हीं की पार्टी के तमाम नेता उनके खिलाफ बोलने लगे थे। इससे पहले से भी पार्टी के सह अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड और माधव नेपाल जैसे तमाम नेता ओली विरोधी मुहिम खुलकर चला रहे थे।





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