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China Will Provide Pakistan Five Lakh Doses Of Coronavirus Vaccine – चीन से पाकिस्तान को मिलेंगी कोरोना की केवल पांच लाख वैक्सीन, लेने भी जाना पड़ेगा

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Updated Thu, 21 Jan 2021 09:47 PM IST

पाक पीएम इमरान खान (फाइल फोटो)
– फोटो : ANI

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पाकिस्तान को गुरुवार को उस समय जोरदार झटका लगा जब चीन ने उसे महज पांच लाख टीका देने की बात कही और उसके लिए भी अपना विमान लेकर आने को कहा। जानकारी के अनुसार चीन 31 जनवरी तक पाकिस्तान को कोरोना टीके की पांच लाख खुराक उपलब्ध कराएगा। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

कुरैशी ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से फोन पर बात करने के बाद एक वीडियो संदेश में कहा कि बीजिंग ने इस्लामाबाद से टीके लेने के लिए विमान भेजने को कहा है। लेकिन यह पाकिस्तान के लिए किसी धोखे से कम नहीं है क्योंकि भारत ने पड़ोसी देश नेपाल को 10 लाख टीके भेजे हैं, जबकि उसकी आबादी 3 करोड़ से भी कम है। वहीं बांग्लादेश की बात करें तो भारत ने उसे 20 लाख डोज दी है और इसकी जनसंख्या 16 करोड़ के पास है।

वहीं इस मामले पर वहीं चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि मैं देश को खुशखबरी देना चाहता हूं कि चीन ने पाकिस्तान को 31 जनवरी तक पांच लाख खुराक तत्काल उपलब्ध कराने का वायदा किया है। हालांकि टीकों की पहली खुराक नि:शुल्क मिलेगी। 

वहीं इससे पहले एक अन्य ट्वीट में कुरैशी ने यह भी बताया कि ये टीके सिनोफार्मा कंपनी के होंगे जो कि भरोसा के लायक है। कुरैशी ने ट्वीट करते हुए कहा कि चाइनीज टीके के अच्छे परिणाम और हमारे ऐतिहासिक रिश्तों के परिणामस्वरूप पाकिस्तान ने सिनोफार्मा वैक्सीन को इमर्जेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी है। पाकिस्तान चीन की ओर से दिए जा रहे 5 लाख डोज से बहुत खुश है।

पाकिस्तान को गुरुवार को उस समय जोरदार झटका लगा जब चीन ने उसे महज पांच लाख टीका देने की बात कही और उसके लिए भी अपना विमान लेकर आने को कहा। जानकारी के अनुसार चीन 31 जनवरी तक पाकिस्तान को कोरोना टीके की पांच लाख खुराक उपलब्ध कराएगा। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

कुरैशी ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से फोन पर बात करने के बाद एक वीडियो संदेश में कहा कि बीजिंग ने इस्लामाबाद से टीके लेने के लिए विमान भेजने को कहा है। लेकिन यह पाकिस्तान के लिए किसी धोखे से कम नहीं है क्योंकि भारत ने पड़ोसी देश नेपाल को 10 लाख टीके भेजे हैं, जबकि उसकी आबादी 3 करोड़ से भी कम है। वहीं बांग्लादेश की बात करें तो भारत ने उसे 20 लाख डोज दी है और इसकी जनसंख्या 16 करोड़ के पास है।

वहीं इस मामले पर वहीं चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि मैं देश को खुशखबरी देना चाहता हूं कि चीन ने पाकिस्तान को 31 जनवरी तक पांच लाख खुराक तत्काल उपलब्ध कराने का वायदा किया है। हालांकि टीकों की पहली खुराक नि:शुल्क मिलेगी। 

वहीं इससे पहले एक अन्य ट्वीट में कुरैशी ने यह भी बताया कि ये टीके सिनोफार्मा कंपनी के होंगे जो कि भरोसा के लायक है। कुरैशी ने ट्वीट करते हुए कहा कि चाइनीज टीके के अच्छे परिणाम और हमारे ऐतिहासिक रिश्तों के परिणामस्वरूप पाकिस्तान ने सिनोफार्मा वैक्सीन को इमर्जेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी है। पाकिस्तान चीन की ओर से दिए जा रहे 5 लाख डोज से बहुत खुश है।



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Bird Flu: Disease Found In Crows And Migratory Birds In Ten States, Ministry Confirmed – बर्ड फ्लूः दस राज्यों में कौओं व प्रवासी पक्षियों में मिला रोग, मंत्रालय ने की पुष्टि

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देश के 10 राज्यों में कौओं व प्रवासी जंगली पक्षियों में भी बर्ड फ्लू मिलने की पुष्टि हुई है। गुरुवार को केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय के अधिकारियों ने प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी दी। 

मंत्रालय के अनुसार जिन 10 राज्यों में कौओं व प्रवासी पक्षियों में एवियन इंफ्लूएंजा वायरस  मिला है वे हैं-छत्तीसगढ़ दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड।  21 जनवरी तक देश के छह राज्यों-छत्तीसगढ़, हरियाणा, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र व पंजाब के पोल्ट्री बर्ड्स यानी मुर्गे-मुर्गियों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। 

इससे पहले रविवार को मंत्रालय ने बताया था कि महाराष्ट्र और हरियाणा में कुक्कुट पक्षियों को मारे जाने का सिलसिला जारी है, जबकि मुंबई के साथ-साथ मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में पोल्ट्री में बर्ड फ्लू के नए मामलों की पुष्टि की गई है। अब तक 11 राज्यों- छत्तीसगढ़, दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और गुजरात में बर्ड फ्लू की पुष्टि हो चुकी है।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि केन्द्रीय कुक्कुट विकास संगठन (सीपीडीओ), मुंबई और मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में कुक्कुट में बर्ड फ्लू के मामलों की पुष्टि की गई है।  मध्य प्रदेश के पन्ना, सांची, रायसेन और बालाघाट में भी कौओं, श्योपुर में कौओं और उल्लू जबकि  मंदसौर जिले में हंस और कबूतर में इस बीमारी की पुष्टि की गई है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में कौए और कबूतर में जबकि दंतेवाड़ा  में कौए में इस वायरल बीमारी की पुष्टि हुई है। इसी तरह उत्तराखंड़ के हरिद्वार और लैंसहाउन से भी कौओं के नमूनों में इस बीमारी की पुष्टि हुई है।





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Jayant Chaudhary Speech In Mathura Over Farmers Protests – जयंत चौधरी ने लगाया केंद्र पर आरोप, ‘किसानों के खिलाफ साजिश रच रही है मोदी सरकार’

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मानागढ़ी में किसान पंचायत को संबोधित करते रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी
– फोटो : अमर उजाला

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मोदी सरकार किसानों के खिलाफ साजिश रच रही है। प्रधानमंत्री मोदी किसानों को मूर्ख समझ रहे हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसान आंदोलन के 58 दिन हो चुके हैं और 70-75 किसानों के शहीद होने के बाद भी कृषि कानूनों पर सरकार सुनने को तैयार नहीं है। यह बात राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने कही।

जयंत चौधरी गुरुवार को नौहझील के गांव बरौठ और मानागढ़ी में किसानों की पंचायत को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार मनमानी और तानाशाही कर रही है। इसके लिए हमें लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी। आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में एकजुट होकर ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा। इसमें किसान बढ़-चढ़ कर भाग लें।

ये भी पढ़ें- Farmers Protest: ट्रैक्टर परेड में शामिल होंगे आगरा के कई किसान, गांवों में जनसंपर्क कर बनाई रणनीति

उन्होंने कहा यदि किसान दिल्ली न जाना चाहें तो वह अपने क्षेत्र में भी ट्रैक्टर मार्च निकाल सकते हैं। इस मौके पर वरिष्ठ नेता कुंवर नरेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष रामरसपाल पौनियां, रविंद्र नरवार, देवराज चौधरी, भगवती चौधरी,  योगेंद्र चौधरी, योगेश नौहवार, सुशील चौधरी, चेतन मलिक, अनुज सिसौदिया, हरपाल, शोभित चौधरी, नरेंद्र चौधरी, बृजेश चौधरी आदि मौजूद रहे।
रालोद उपाध्यक्ष जयंत का बाजना कट पर किया स्वागत
नौहझील में आयोजित किसान पंचायत में शामिल होने जा रहे रालोद उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद जयंत चौधरी का बाजना कट पर रालोद कार्यकर्ता-पदाधिकारियों से स्वागत किया। इस दौरान उन्हें माला और दुपट्टा ओढ़ाया गया। स्वागत कार्यक्रम के बाद कार्यकर्ता पूर्व सांसद के साथ किसान पंचायत के लिए रवाना हो गए। स्वागत करने वालों में जिलाध्यक्ष रामरसपाल सिंह पौनियां, रविंद्र नरवार, रालोद नेता मनोज शर्मा, जयवीर सिंह, ताराचंद गोस्वामी, गौरव मलिक, विवेक देशवार आदि प्रमुख रहे। 

रालोद की किसान पंचायत में पहुंचे सौंख से कार्यकर्ता
गांव मनागढ़ी में रालोद द्वारा आयोजित किसान पंचायत में सौंख से बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने पूर्व सांसद जयंत चौधरी का संबोधन सुना। पंचायत में भाग लेने वालों में ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि बाबूलाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चेतन मलिक, सुरेश भगत, जिला महामंत्री बच्चू सिंह चाहर, महासचिव बलजीत सिंह, प्रेम सिंह, भोला सिंह, संतोष चाहर, योगेश सिंह, शिव कुमार, धीरेंद्र सिंह, संतोष राणा, नीरज सिंह, वीरेंद्र सिंह, गंभीर सिंह आदि प्रमुख रहे। 

मोदी सरकार किसानों के खिलाफ साजिश रच रही है। प्रधानमंत्री मोदी किसानों को मूर्ख समझ रहे हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसान आंदोलन के 58 दिन हो चुके हैं और 70-75 किसानों के शहीद होने के बाद भी कृषि कानूनों पर सरकार सुनने को तैयार नहीं है। यह बात राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने कही।

जयंत चौधरी गुरुवार को नौहझील के गांव बरौठ और मानागढ़ी में किसानों की पंचायत को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार मनमानी और तानाशाही कर रही है। इसके लिए हमें लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी। आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में एकजुट होकर ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा। इसमें किसान बढ़-चढ़ कर भाग लें।

ये भी पढ़ें- Farmers Protest: ट्रैक्टर परेड में शामिल होंगे आगरा के कई किसान, गांवों में जनसंपर्क कर बनाई रणनीति

उन्होंने कहा यदि किसान दिल्ली न जाना चाहें तो वह अपने क्षेत्र में भी ट्रैक्टर मार्च निकाल सकते हैं। इस मौके पर वरिष्ठ नेता कुंवर नरेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष रामरसपाल पौनियां, रविंद्र नरवार, देवराज चौधरी, भगवती चौधरी,  योगेंद्र चौधरी, योगेश नौहवार, सुशील चौधरी, चेतन मलिक, अनुज सिसौदिया, हरपाल, शोभित चौधरी, नरेंद्र चौधरी, बृजेश चौधरी आदि मौजूद रहे।



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Corona Vaccination Today, Know Total Number Of People Vaccinated On 21st January – Covid-19: देश में 10 लाख के करीब पहुंची टीका लगवाने वालों की संख्या, आज एक भी मौत नहीं

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 21 Jan 2021 07:46 PM IST

स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस वार्ता

स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस वार्ता
– फोटो : ANI

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देश में कोरोना टीकाकरण का आज छठा दिन है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 16 जनवरी से लेकर गुरुवार शाम छह बजे तक 9,99,065 लोगों को टीका लगाया गया है, वहीं विशेष रूप से गुरुवार की बात करें तो शाम छह बजे तक 1,92,581 लाभार्थियों को टीका लगाया गया। आज राहत की बात यह रही कि एक भी मौत का मामला सामने नहीं आया।



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Scooters India Ltd Lucknow Latest News Scooters India Products Lambretta Vijai Super Vikram Lambro Cabinet Committee On Economic Affairs (ccea) – लम्ब्रेटा और विजय सुपर जैसे मशहूर स्कूटर बनाने वाली स्कूटर्स इंडिया पर लगेगा ताला, मोदी सरकार ने दी मंजूरी

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ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 21 Jan 2021 07:35 PM IST

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Lambretta (लम्ब्रेटा) और Vijai Super (विजय सुपर) जैसे लोकप्रिय स्कूटरों को बनाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की ऑटोमोबाइल कंपनी Scooters India Ltd (स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड) जल्द बंद होने जा रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कंपनी को बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सूत्रों ने बताया कि समझा जाता है कि मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने बुधवार को हुई बैठक में लखनऊ की कंपनी स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड को बंद करने की मंजूरी दे दी है। 
इन मशहूर ब्रांड्स की मालिक
एक अधिकारी ने बताया कि स्कूटर्स इंडिया के ब्रांड नाम को अलग से बेचा जाएगा, क्योंकि कंपनी के पास Lambretta (लम्ब्रेटा), Vijai Super (विजय सुपर), Vikram (विक्रम) और Lambro (लैम्ब्रो) जैसे मशहूर ब्रांड हैं। कंपनी विक्रम ब्रांड के तहत कई प्रकार के तीन पहिया वाहनों को बनाती है। कंपनी को बंद करने के प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी के बाद भारी उद्योग मंत्रालय इसको बंद करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। 
कंपनी बंद करने के लिए चाहिए 65.12 करोड़ रुपये
सूत्रों ने बताया कि स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड को बंद करने के लिए 65.12 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। यह राशि सरकार से ऋण के रूप में ली जाएगी। प्रस्ताव के तहत यह कोष उपलब्ध होने के बाद कंपनी के नियमित कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना/स्वैच्छिक पृथकीकरण योजना (वीआरएस/वीएसएस) की पेशकश की जाएगी। लखनऊ मुख्यालय वाली कंपनी के करीब 100 कर्मचारी हैं। 
इन्हें हटाएगी कंपनी
अधिकारी ने बताया कि वीआरएस/वीएसएस का विकल्प नहीं चुनने वाली कर्मचारियों को औद्योगिक विवाद कानून, 1947 के तहत हटाया जाएगा। कंपनी की 147.49 एकड़ जमीन उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण को आपसी सहमति वाली दरों पर लौटाई जाएगी। हालांकि, इस प्रक्रिया में समय लगने की संभावना है।

सार

सूत्रों ने बताया कि स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड को बंद करने के लिए 65.12 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। यह राशि सरकार से ऋण के रूप में ली जाएगी।

विस्तार

Lambretta (लम्ब्रेटा) और Vijai Super (विजय सुपर) जैसे लोकप्रिय स्कूटरों को बनाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की ऑटोमोबाइल कंपनी Scooters India Ltd (स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड) जल्द बंद होने जा रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कंपनी को बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सूत्रों ने बताया कि समझा जाता है कि मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने बुधवार को हुई बैठक में लखनऊ की कंपनी स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड को बंद करने की मंजूरी दे दी है। 



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Pm Housing: Construction Of 1.68 Lakh Houses Approved, Home Minister Shah Said-housing To All Till 20222 – पीएम आवासः 1.68 लाख मकानों के निर्माण को मंजूरी, गृह मंत्री शाह बोले-2022 तक सबको आवास मिलेगा

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 21 Jan 2021 05:43 PM IST

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केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में 1.68 लाख से अधिक मकानों के निर्माण को मंजूरी दी है। इस तरह अब तक मंजूर किए गए मकानों की कुल संख्या 1.1 करोड़ हो गई है। इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने उम्मीद जताई कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 15 अगस्त 2022 तक देश में सबको आवास मुहैया करा दिए जाएंगे।

गृह मंत्री शाह ने गुरुवार को अहमदाबाद के शिलाज इलाके में एक किलोमीटर लंबे ओवरब्रिज का वर्चुअल लोकार्पण करते हुए यह बात कही। 

इससे पहले केन्द्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने बताया कि केन्द्रीय मंजूरी और निगरानी समिति (सीएसएमसी) की एक बैठक में शहरी क्षेत्रों में 1.68 लाख से अधिक मकानों के निर्माण को मंजूरी देने का निर्णय लिया गया। बुधवार को हुई इस बैठक में 14 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों ने भाग लिया। मंत्रालय ने कहा, ‘‘राज्यों ने भूमि, स्थलाकृतिक खतरों, अंतर-शहर पलायन, प्राथमिकता बदलने आदि जैसे विभिन्न मुद्दों के कारण परियोजनाओं के संशोधन के लिए अपने प्रस्ताव रखे।’’

41 लाख मकानों का निर्माण पूरा, 70 लाख का जारी
पीएमएवाई-यू के तहत अब तक 41 लाख मकानों का काम पूरा हो चुका हैं जबकि 70 लाख से अधिक मकानों के निर्माण का काम विभिन्न चरणों में है। मंत्रालय ने बताया, ‘‘केन्द्रीय मंजूरी और निगरानी समिति (सीएसएमसी) की बैठक में पीएमएवाई (शहरी) के तहत 1,68,606 नएमकानों के निर्माण को मंजूरी दी गई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जून 2015 में शुरू की गई पीएमएवाई (यू) का उद्देश्य 2022 तक सभी के लिए आवास उपलब्ध कराना है। सरकार ने 2015 से 2022 तक देश में शहरी क्षेत्रों में 1.12 करोड़ मकानों के निर्माण का लक्ष्य रखा है।

मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने एक बयान में कहा, ‘‘मिशन (पीएमएवाई-यू) के तहत प्रगति स्थिर रही है। हमें सभी बुनियादी भौतिक और सामाजिक ढांचे के साथ मकानों के निर्माण का काम पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ना है।’’

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में 1.68 लाख से अधिक मकानों के निर्माण को मंजूरी दी है। इस तरह अब तक मंजूर किए गए मकानों की कुल संख्या 1.1 करोड़ हो गई है। इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने उम्मीद जताई कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 15 अगस्त 2022 तक देश में सबको आवास मुहैया करा दिए जाएंगे।

गृह मंत्री शाह ने गुरुवार को अहमदाबाद के शिलाज इलाके में एक किलोमीटर लंबे ओवरब्रिज का वर्चुअल लोकार्पण करते हुए यह बात कही। 

इससे पहले केन्द्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने बताया कि केन्द्रीय मंजूरी और निगरानी समिति (सीएसएमसी) की एक बैठक में शहरी क्षेत्रों में 1.68 लाख से अधिक मकानों के निर्माण को मंजूरी देने का निर्णय लिया गया। बुधवार को हुई इस बैठक में 14 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों ने भाग लिया। मंत्रालय ने कहा, ‘‘राज्यों ने भूमि, स्थलाकृतिक खतरों, अंतर-शहर पलायन, प्राथमिकता बदलने आदि जैसे विभिन्न मुद्दों के कारण परियोजनाओं के संशोधन के लिए अपने प्रस्ताव रखे।’’

41 लाख मकानों का निर्माण पूरा, 70 लाख का जारी

पीएमएवाई-यू के तहत अब तक 41 लाख मकानों का काम पूरा हो चुका हैं जबकि 70 लाख से अधिक मकानों के निर्माण का काम विभिन्न चरणों में है। मंत्रालय ने बताया, ‘‘केन्द्रीय मंजूरी और निगरानी समिति (सीएसएमसी) की बैठक में पीएमएवाई (शहरी) के तहत 1,68,606 नएमकानों के निर्माण को मंजूरी दी गई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जून 2015 में शुरू की गई पीएमएवाई (यू) का उद्देश्य 2022 तक सभी के लिए आवास उपलब्ध कराना है। सरकार ने 2015 से 2022 तक देश में शहरी क्षेत्रों में 1.12 करोड़ मकानों के निर्माण का लक्ष्य रखा है।

मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने एक बयान में कहा, ‘‘मिशन (पीएमएवाई-यू) के तहत प्रगति स्थिर रही है। हमें सभी बुनियादी भौतिक और सामाजिक ढांचे के साथ मकानों के निर्माण का काम पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ना है।’’



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Pakistan Army Resorted To Unprovoked Ceasefire Violations On Loc, Indian Army Jawan Martyred – जम्मू-कश्मीरः कृष्णा घाटी में पाकिस्तान ने किया संघर्षविराम का उल्लंघन, सेना का एक जवान शहीद

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Thu, 21 Jan 2021 06:14 PM IST

हवलदार निर्मल सिंह की फाइल फोटो
– फोटो : भारतीय सेना

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पाकिस्तानी सेना ने पुंछ जिले में कृष्णाघाटी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर अकारण संघर्षविराम का उल्लंघन किया। इस दौरान सीमा पार से भारी गोलाबारी की गई। भारतीय सेना के जवानों ने दुश्मन की गोलाबारी का कड़ा जवाब दिया। इस घटना में सेना के हवलदार निर्मल सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए।

जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। सैन्य प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए कहा कि हवलदार निर्मल सिंह बहादुर और ईमानदार सैनिक थे। उनके सर्वोच्च बलिदान और कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए राष्ट्र हमेशा उनका ऋणी रहेगा।

उधर, अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ और सांबा जिले में ड्रोन से हथियार गिराने के लिए पाकिस्तान ने साजिशें तेज कर दी हैं। जम्मू-कश्मीर में सांबा से गुजरने वाला हाईवे अंतरराष्ट्रीय सीमा से सबसे नजदीक पड़ता है। विजयपुर में एम्स के नजदीक हाईवे की जीरो लाइन से दूरी बमुश्किल छह किलोमीटर है। इसी नजदीकी को भुनाने के लिए पाकिस्तान ने हाल के समय में सुरंगें खोदने और ड्रोन से हथियार गिराने का सिलसिला तेज किया है। ड्रोन से हथियार गिराने की ताजा घटना भी इसी क्रम को दर्शाती है।

यह भी पढ़ेंः लद्दाख की रहस्यमयी पहाड़ी जहां छुपा है गहरा राज, जानिए कैसे खुद-ब-खुद ऊपर चढ़ती हैं गाड़ियां  

नगरोटा में मारे गए आतंकियों का रूट भी सांबा जिले में खोदी गई सुरंग से जुड़ा था। वहीं कई बार ड्रोन से हथियार गिराने की घटनाएं हो चुकी हैं। दरअसल बसंतर और देविका नदी जिस जगह आपस में जुड़ती हैं, उससे बिल्कुल नजदीक अंतरराष्ट्रीय सीमा पड़ती है। इसी नदी क्षेत्र को आतंकी गतिविधियाें के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इस रूट से हाईवे और सीमा की दूरी छह किलोमीटर से भी कम है। 

यह भी पढ़ेंः कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का दर्दः हाथ पैर की हड्डियां तोड़ी, आंख फोड़ी फिर… 

रक्षा सूत्रों के अनुसार सुरंग से आतंकी घुसपैठ होने पर आतंकियों के लिए हाईवे तक पहुंचने का फासला अन्य इलाकों की तुलना में काफी कम है। यही वजह है कि सीमा पार से आतंकी साजिशों को अंजाम देने के लिए सांबा सेक्टर में हलचल तेज की गई है। हाईवे के दोनों तरफ नदी का क्षेत्र है जबकि उत्तर दिशा में जंगल क्षेत्र है, जिसे संदिग्ध गतिविधियाें के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। बंसतर व देविका नदी क्षेत्र आतंकी घुसपैठ के पुराने मार्ग रहे हैं। इन्हीं मार्गों को आतंकी दोबारा सक्रिय करने की फिराक में हैं।

 

पाकिस्तानी सेना ने पुंछ जिले में कृष्णाघाटी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर अकारण संघर्षविराम का उल्लंघन किया। इस दौरान सीमा पार से भारी गोलाबारी की गई। भारतीय सेना के जवानों ने दुश्मन की गोलाबारी का कड़ा जवाब दिया। इस घटना में सेना के हवलदार निर्मल सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए।

जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। सैन्य प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए कहा कि हवलदार निर्मल सिंह बहादुर और ईमानदार सैनिक थे। उनके सर्वोच्च बलिदान और कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए राष्ट्र हमेशा उनका ऋणी रहेगा।

उधर, अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ और सांबा जिले में ड्रोन से हथियार गिराने के लिए पाकिस्तान ने साजिशें तेज कर दी हैं। जम्मू-कश्मीर में सांबा से गुजरने वाला हाईवे अंतरराष्ट्रीय सीमा से सबसे नजदीक पड़ता है। विजयपुर में एम्स के नजदीक हाईवे की जीरो लाइन से दूरी बमुश्किल छह किलोमीटर है। इसी नजदीकी को भुनाने के लिए पाकिस्तान ने हाल के समय में सुरंगें खोदने और ड्रोन से हथियार गिराने का सिलसिला तेज किया है। ड्रोन से हथियार गिराने की ताजा घटना भी इसी क्रम को दर्शाती है।

यह भी पढ़ेंः लद्दाख की रहस्यमयी पहाड़ी जहां छुपा है गहरा राज, जानिए कैसे खुद-ब-खुद ऊपर चढ़ती हैं गाड़ियां  

नगरोटा में मारे गए आतंकियों का रूट भी सांबा जिले में खोदी गई सुरंग से जुड़ा था। वहीं कई बार ड्रोन से हथियार गिराने की घटनाएं हो चुकी हैं। दरअसल बसंतर और देविका नदी जिस जगह आपस में जुड़ती हैं, उससे बिल्कुल नजदीक अंतरराष्ट्रीय सीमा पड़ती है। इसी नदी क्षेत्र को आतंकी गतिविधियाें के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इस रूट से हाईवे और सीमा की दूरी छह किलोमीटर से भी कम है। 

यह भी पढ़ेंः कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का दर्दः हाथ पैर की हड्डियां तोड़ी, आंख फोड़ी फिर… 

रक्षा सूत्रों के अनुसार सुरंग से आतंकी घुसपैठ होने पर आतंकियों के लिए हाईवे तक पहुंचने का फासला अन्य इलाकों की तुलना में काफी कम है। यही वजह है कि सीमा पार से आतंकी साजिशों को अंजाम देने के लिए सांबा सेक्टर में हलचल तेज की गई है। हाईवे के दोनों तरफ नदी का क्षेत्र है जबकि उत्तर दिशा में जंगल क्षेत्र है, जिसे संदिग्ध गतिविधियाें के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। बंसतर व देविका नदी क्षेत्र आतंकी घुसपैठ के पुराने मार्ग रहे हैं। इन्हीं मार्गों को आतंकी दोबारा सक्रिय करने की फिराक में हैं।

 



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England Squad For The First Two Tests Against India – भारत के खिलाफ इंग्लिश टेस्ट टीम का एलान, स्टोक्स-आर्चर सहित इन खिलाड़ियों की हुई वापसी

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स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 21 Jan 2021 07:25 PM IST

इंग्लैंड क्रिकेट टीम
– फोटो : social media

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इंग्लैंड ने गुरुवार को टीम इंडिया के खिलाफ पहले दो टेस्ट मैचों के लिए अपनी टीम की घोषणा कर दी। 
 

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Earthquake In Philippines, An Earthquake With A Magnitude Of 7.0 On The Richter Scale Hit 210 Km Se Of Pondaguitan, Philippines – भूकंप के तेज झटकों से कांपा फिलीपींस, रिक्टर पैमाने पर 7.0 रही तीव्रता

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मनीला
Updated Thu, 21 Jan 2021 06:39 PM IST

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फिलीपींस में गुरुवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.0 मापी गई। यह भूकंप दोपहर 12:23 बजे आया। भूकंप का केंद्र फिलीपींस से 210 किमी दूर पोंगडूइटान में रहा।

 

फिलीपींस में गुरुवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.0 मापी गई। यह भूकंप दोपहर 12:23 बजे आया। भूकंप का केंद्र फिलीपींस से 210 किमी दूर पोंगडूइटान में रहा।

 





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Farmers Protest: Farmer Leaders Said, Government Is Throwing Sweet Fodder To The Farmers, How We Can Trust On Them – किसान नेता बोले, मीठा चारा फेंक रही सरकार पर कैसे करें ऐतबार?

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किसान नेताओं और सरकार की बैठक
– फोटो : अमर उजाला (फाइल)

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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अगले डेढ़ साल तक तीनों कृषि कानूनों को निलंबित रखने का प्रस्ताव जरूर दिया है, लेकिन किसान संगठन केन्द्र सरकार पर ऐतबार नहीं कर पा रहे हैं। किसान संगठन आज दो बंजे सिंघु बॉर्डर पर मैराथन बैठक कर आंदोलन के भविष्य, सरकार के प्रस्ताव और अपनी मांगों पर एकजुटता बनाने की रणनीति पर निर्णय लेंगे। फिलहाल किसानों की मंशा केन्द्र सरकार के मीठे जाल में फंसने की नहीं है। उनका कहना है कि सरकार की मंशा ठीक नहीं है। वह कभी हमें राष्ट्र विरोधी, कभी खालिस्तानी और कभी कुछ बताती है। कभी हमारे आंदोलन को बड़े किसानों का आंदोलन बताती है। इसलिए इस बार हम अंतिम निर्णय लेकर ही जाएंगे।

किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी, भारतीय किसान यूनियन (असली, अराजनैतिक) के अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह समेत सभी ने इसे लेकर तैयारियां तेज कर दी है। अभी 12 बजे से किसान नेताओं की राज्यवार बैठक प्रस्तावित है और दो बजे से राष्ट्रीय स्तर तक की बैठक होगी। इस बैठक में हरियाणा, पंजाब, पश्चिीमी उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के किसान नेता अगली रणनीति पर चर्चा करेंगे, और निर्णय लेंगे। किसान नेता हरमीत सिंह कादियान का भी कहना है कि केंद्र सरकार का शुरू से ही रवैया किसान विरोधी रहा है। इसलिए केन्द्र सरकार ने खुद भरोसे लायक कोई जमीन नहीं छोड़ी है।

क्या है केन्द्र सरकार की मंशा?

किसान नेता चौधरी हरपाल सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार दिल्ली की सीमा पर डटे और देश के दूसरे हिस्सों से कूच कर चुके लाखों किसानों को किसी तरह से एक बार उनके खलिहान की तरफ भेजने की रणनीति पर काम कर रही है। चौधरी हरपाल सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार की नियत साफ नहीं है। वह तो शुरू से आंदोलन को बदनाम कर रही है। दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलनरत हमारे 125 किसान शहीद हो गए और केंद्र सरकार, उनके मंत्रियों के मुंह से श्रद्धांजलि के शब्द तक नहीं निकले।

अभी तक केन्द्र सरकार कह रही थी कि वह तीनों कानूनों को रद्द नहीं करेगी, बरगलाने के लिए एमएसपी पर खरीद का जुमला छोड़ रही थी, कृषि मंत्री कह रहे थे कि वह एक दिन के लिए भी तीनों कानूनों को निलंबित नहीं रख सकते। फिर अचानक कैसे डेढ़ साल के लिए निलंबित रखने के लिए तैयार हो रहे हैं? इससे तो अच्छा है कि सरकार जिद छोड़े, कानूनों को रद्द करे और नए सिरे से कानून लाने के लिए मिलकर होमवर्क करे। हरपाल सिंह का कहना है कि किसान संगठन केन्द्र सरकार की हर नियत को भांपने, समझने में सक्षम हैं।

हमारी दो प्रमुख मांगें अभी भी हैं

हरमीत सिंह कादियान और चौधरी हरपाल सिंह का कहना है कि किसान एमएसपी पर खरीद की गारंटी और तीनों काले कानूनों को वापस लेने की मांग के साथ दिल्ली की सीमा पर आ डटे हैं। उनकी दोनों मांगें अभी भी बनी हुई हैं। सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। केन्द्र सरकार ने इससे पहले भी कहा था कि वह स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करेगी, लेकिन कहां लागू किया? हरपाल सिंह कहते हैं कि यह कोई बाबा रामदेव का आंदोलन नहीं है, जिसे केन्द्र सरकार डंडे के बल पर भगा देगी। हम किसान हैं, शांतिपूर्ण तरीके से अपना प्रदर्शन कर रहे हैं। लाखों की संख्या में हैं, सौ से अधिक किसान प्रदर्शन करते हुए शहीद हो गए, लेकिन किसी को एक खरोंच भी नहीं आई। हम इसी शिद्दत से अपनी मांग को लेकर डटे रहेंगे।

पुलिस की धौंस से डरने वाले नहीं, निकलेगी ट्रैक्टर परेड

गुरनाम सिंह चढ़ूनी पंजाब के किसान नेताओं के साथ बैठक में व्यस्त थे। लिहाजा बात नहीं हो पाई। किसान नेता हनन मुल्ला को भी सरकार के प्रस्ताव पर भरोसा नहीं है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश से हजारों किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली की तरफ कूच करना शुरू कर दिया है। देश की खुफिया एजेंसी भी काफी सतर्कता बरत रही है। पंजाब से ही 10-15 हजार ट्रैक्टरों के रवाना होने की सूचना आ रही है।

ट्रैक्टर मार्च के बारे में पंजाब के किसान नेताओं का कहना है कि इसे हम गणतंत्र दिवस के दिन करेंगे। चौधरी हरपाल सिंह भी कहते हैं कि केन्द्र सरकार हमें पुलिस की धौंस न दिखाए। ट्रैक्टर मार्च होकर रहेगा। रहा सवाल हिंसा और सुरक्षा का तो 56 दिन के आंदोलन में किसानों ने न केवल अपना धैर्य, संयम दिखाया है, बल्कि पूरी तरह से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। हमने किसी को भी कोई शारीरिक क्षति नहीं पहुंचाई है। चौधरी हरपाल सिंह का कहना है कि हमारे बेटे ही देश की सीमाओं की सुरक्षा करते हैं। वह पुलिस, अर्ध सैनिकबल और सेना में हैं। हम देश की सुरक्षा का सही अर्थ भी समझते हैं।

किसानों के सामने भी है एक चुनौती

किसान इसे अपने लिए बड़ी चुनौती मान रहे हैं। किसान संगठन से जुड़े एक बड़े नेता का कहना है कि पंजाब से चलकर दिल्ली आने में कितने पापड़ बेलने पड़े, कितनी बार पानी की बौछारें और  हरियाणा सरकार के जुल्म सहने पड़े, हम जानते हैं। लाखों की संख्या में किसानों के साथ सिंघु, टिकरी, गाजीपुर बार्डर पर आना, 56 दिन कड़ाके की ठंड, बारिश, शीत लहर को झेलना, संसाधन खड़ा करना आसान नहीं है। इसलिए एक बार जब किसान बिना मांग पूरी हुए खलिहान की तरफ लौट गया, तो अगले दस साल तक अपनी मांगों को लेकर इतना बड़ा आंदोलन करने की जहमत नहीं उठाई जा सकेगी।

होशियारपुर, मोंगा और गुरुदासपुर से आए युवा किसान की टोली का भी यही मानना है। बीटेक, एमबीए और बीबीए कर चुके युवा अपने चाचा, ताऊ, दादा के साथ आंदोलन में शामिल हैं। उनका कहना है कि सरकार तीनों कानून में संशोधन करने को तैयार है, डेढ़ साल के लिए इन्हें निलंबित करने के लिए तैयार है तो आखिर रद्द नहीं करने की जिद क्यों पकड़कर बैठ गई है।

सार

  • रेलमंत्री ने कहा रेलवे का निजीकरण नहीं करेंगे और करना शुरू कर दिया तो भरोसा कैसे करें
  • सरकार की मंशा ठीक नहीं, इरादा किसानों को उनके खलिहानों तक वापस भेजना है
  • तीन कृषि कानून रद्द होने, एमएसपी की गारंटी मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन
  • डेढ़ साल तक कानूनों को निलंबित रखने से अच्छा है कि उन्हें वापस ले सरकार

विस्तार

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अगले डेढ़ साल तक तीनों कृषि कानूनों को निलंबित रखने का प्रस्ताव जरूर दिया है, लेकिन किसान संगठन केन्द्र सरकार पर ऐतबार नहीं कर पा रहे हैं। किसान संगठन आज दो बंजे सिंघु बॉर्डर पर मैराथन बैठक कर आंदोलन के भविष्य, सरकार के प्रस्ताव और अपनी मांगों पर एकजुटता बनाने की रणनीति पर निर्णय लेंगे। फिलहाल किसानों की मंशा केन्द्र सरकार के मीठे जाल में फंसने की नहीं है। उनका कहना है कि सरकार की मंशा ठीक नहीं है। वह कभी हमें राष्ट्र विरोधी, कभी खालिस्तानी और कभी कुछ बताती है। कभी हमारे आंदोलन को बड़े किसानों का आंदोलन बताती है। इसलिए इस बार हम अंतिम निर्णय लेकर ही जाएंगे।

किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी, भारतीय किसान यूनियन (असली, अराजनैतिक) के अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह समेत सभी ने इसे लेकर तैयारियां तेज कर दी है। अभी 12 बजे से किसान नेताओं की राज्यवार बैठक प्रस्तावित है और दो बजे से राष्ट्रीय स्तर तक की बैठक होगी। इस बैठक में हरियाणा, पंजाब, पश्चिीमी उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के किसान नेता अगली रणनीति पर चर्चा करेंगे, और निर्णय लेंगे। किसान नेता हरमीत सिंह कादियान का भी कहना है कि केंद्र सरकार का शुरू से ही रवैया किसान विरोधी रहा है। इसलिए केन्द्र सरकार ने खुद भरोसे लायक कोई जमीन नहीं छोड़ी है।

क्या है केन्द्र सरकार की मंशा?

किसान नेता चौधरी हरपाल सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार दिल्ली की सीमा पर डटे और देश के दूसरे हिस्सों से कूच कर चुके लाखों किसानों को किसी तरह से एक बार उनके खलिहान की तरफ भेजने की रणनीति पर काम कर रही है। चौधरी हरपाल सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार की नियत साफ नहीं है। वह तो शुरू से आंदोलन को बदनाम कर रही है। दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलनरत हमारे 125 किसान शहीद हो गए और केंद्र सरकार, उनके मंत्रियों के मुंह से श्रद्धांजलि के शब्द तक नहीं निकले।

अभी तक केन्द्र सरकार कह रही थी कि वह तीनों कानूनों को रद्द नहीं करेगी, बरगलाने के लिए एमएसपी पर खरीद का जुमला छोड़ रही थी, कृषि मंत्री कह रहे थे कि वह एक दिन के लिए भी तीनों कानूनों को निलंबित नहीं रख सकते। फिर अचानक कैसे डेढ़ साल के लिए निलंबित रखने के लिए तैयार हो रहे हैं? इससे तो अच्छा है कि सरकार जिद छोड़े, कानूनों को रद्द करे और नए सिरे से कानून लाने के लिए मिलकर होमवर्क करे। हरपाल सिंह का कहना है कि किसान संगठन केन्द्र सरकार की हर नियत को भांपने, समझने में सक्षम हैं।

हमारी दो प्रमुख मांगें अभी भी हैं

हरमीत सिंह कादियान और चौधरी हरपाल सिंह का कहना है कि किसान एमएसपी पर खरीद की गारंटी और तीनों काले कानूनों को वापस लेने की मांग के साथ दिल्ली की सीमा पर आ डटे हैं। उनकी दोनों मांगें अभी भी बनी हुई हैं। सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। केन्द्र सरकार ने इससे पहले भी कहा था कि वह स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करेगी, लेकिन कहां लागू किया? हरपाल सिंह कहते हैं कि यह कोई बाबा रामदेव का आंदोलन नहीं है, जिसे केन्द्र सरकार डंडे के बल पर भगा देगी। हम किसान हैं, शांतिपूर्ण तरीके से अपना प्रदर्शन कर रहे हैं। लाखों की संख्या में हैं, सौ से अधिक किसान प्रदर्शन करते हुए शहीद हो गए, लेकिन किसी को एक खरोंच भी नहीं आई। हम इसी शिद्दत से अपनी मांग को लेकर डटे रहेंगे।

पुलिस की धौंस से डरने वाले नहीं, निकलेगी ट्रैक्टर परेड

गुरनाम सिंह चढ़ूनी पंजाब के किसान नेताओं के साथ बैठक में व्यस्त थे। लिहाजा बात नहीं हो पाई। किसान नेता हनन मुल्ला को भी सरकार के प्रस्ताव पर भरोसा नहीं है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश से हजारों किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली की तरफ कूच करना शुरू कर दिया है। देश की खुफिया एजेंसी भी काफी सतर्कता बरत रही है। पंजाब से ही 10-15 हजार ट्रैक्टरों के रवाना होने की सूचना आ रही है।

ट्रैक्टर मार्च के बारे में पंजाब के किसान नेताओं का कहना है कि इसे हम गणतंत्र दिवस के दिन करेंगे। चौधरी हरपाल सिंह भी कहते हैं कि केन्द्र सरकार हमें पुलिस की धौंस न दिखाए। ट्रैक्टर मार्च होकर रहेगा। रहा सवाल हिंसा और सुरक्षा का तो 56 दिन के आंदोलन में किसानों ने न केवल अपना धैर्य, संयम दिखाया है, बल्कि पूरी तरह से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। हमने किसी को भी कोई शारीरिक क्षति नहीं पहुंचाई है। चौधरी हरपाल सिंह का कहना है कि हमारे बेटे ही देश की सीमाओं की सुरक्षा करते हैं। वह पुलिस, अर्ध सैनिकबल और सेना में हैं। हम देश की सुरक्षा का सही अर्थ भी समझते हैं।

किसानों के सामने भी है एक चुनौती

किसान इसे अपने लिए बड़ी चुनौती मान रहे हैं। किसान संगठन से जुड़े एक बड़े नेता का कहना है कि पंजाब से चलकर दिल्ली आने में कितने पापड़ बेलने पड़े, कितनी बार पानी की बौछारें और  हरियाणा सरकार के जुल्म सहने पड़े, हम जानते हैं। लाखों की संख्या में किसानों के साथ सिंघु, टिकरी, गाजीपुर बार्डर पर आना, 56 दिन कड़ाके की ठंड, बारिश, शीत लहर को झेलना, संसाधन खड़ा करना आसान नहीं है। इसलिए एक बार जब किसान बिना मांग पूरी हुए खलिहान की तरफ लौट गया, तो अगले दस साल तक अपनी मांगों को लेकर इतना बड़ा आंदोलन करने की जहमत नहीं उठाई जा सकेगी।

होशियारपुर, मोंगा और गुरुदासपुर से आए युवा किसान की टोली का भी यही मानना है। बीटेक, एमबीए और बीबीए कर चुके युवा अपने चाचा, ताऊ, दादा के साथ आंदोलन में शामिल हैं। उनका कहना है कि सरकार तीनों कानून में संशोधन करने को तैयार है, डेढ़ साल के लिए इन्हें निलंबित करने के लिए तैयार है तो आखिर रद्द नहीं करने की जिद क्यों पकड़कर बैठ गई है।



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