Government Will Blame Opposition For Delhi Violence In Parliament – दिल्ली हिंसा पर संसद में चर्चा के लिए केंद्र सरकार तैयार, विपक्ष के सिर फोड़ेगी ठीकरा

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दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा पर संसद में मचे सियासी कोहराम के बीच सरकार ने इस मामले में रक्षात्मक के बजाय आक्रामक भूमिका निभाने की रणनीति तैयार की है। रणनीति के तहत संसद में सरकार दिल्ली हिंसा का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ेगी। विपक्षी नेताओं को ही इसका जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसमें खासतौर पर गांधी परिवार के सदस्यों के नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ बयानों को जवाबी हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है।

सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक फिलहाल सरकार दिल्ली हिंसा पर होली के बाद 11 मार्च को चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि परिस्थिति के अनुरूप इस तिथि में बदलाव भी संभव है। जहां तक सांप्रदायिक हिंसा का सवाल है तो सरकार इसके लिए विपक्ष के नेताओं द्वारा एक विशेष वर्ग को उकसाने के लिए दिए बयानों को जिम्मेदार ठहराएगी। जैसे कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सीएए के मामले में आर या पार की जंग का एलान किया था। वहीं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सीएए के विरोध में इसी तरह के बयान और ट्वीट किए थे।

गृहमंत्री चुन-चुन कर देंगे जवाब

गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के सभी हमलों का चुन चुनकर जवाब देंगे। शाह इस दौरान सीएए के पक्ष में सरकार के अडिग रहने का भी सीधा संदेश देंगे। दरअसल, लोगों को भड़काने के मामले में अब तक आप के वर्तमान तो कांग्रेस के पूर्व पार्षद की गिरफ्तारी हुई है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस की जांच में भी लोगों को भड़काने से संबंधित कई तथ्य सामने आए हैं। ऐसे में शाह विपक्ष पर सीधा निशान साधेंगे।

आपत्तिजनक बयान देने वालों पर कार्रवाई नहीं

सूत्रों के मुताबिक सरकार या पार्टी मंत्रियों-नेताओं के आपत्तिजनक बयान के मामले में फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं करेगी। गौरतलब है कि विपक्ष दिल्ली विधानसभा चुनाव में मंत्री अनुराग ठाकुर, सांसद प्रवेश वर्मा के भड़काऊ बयान को मुद्दा बना रहा है।

सार

सांप्रदायिक हिंसा के लिए सरकार विपक्षी नेताओं द्वारा एक विशेष वर्ग को उकसाने के लिए दिए बयानों को जिम्मेदार ठहराएगी। जैसे कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सीएए के मामले में आर या पार की जंग का एलान किया था। व

विस्तार

दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा पर संसद में मचे सियासी कोहराम के बीच सरकार ने इस मामले में रक्षात्मक के बजाय आक्रामक भूमिका निभाने की रणनीति तैयार की है। रणनीति के तहत संसद में सरकार दिल्ली हिंसा का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ेगी। विपक्षी नेताओं को ही इसका जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसमें खासतौर पर गांधी परिवार के सदस्यों के नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ बयानों को जवाबी हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है।

सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक फिलहाल सरकार दिल्ली हिंसा पर होली के बाद 11 मार्च को चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि परिस्थिति के अनुरूप इस तिथि में बदलाव भी संभव है। जहां तक सांप्रदायिक हिंसा का सवाल है तो सरकार इसके लिए विपक्ष के नेताओं द्वारा एक विशेष वर्ग को उकसाने के लिए दिए बयानों को जिम्मेदार ठहराएगी। जैसे कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सीएए के मामले में आर या पार की जंग का एलान किया था। वहीं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सीएए के विरोध में इसी तरह के बयान और ट्वीट किए थे।

गृहमंत्री चुन-चुन कर देंगे जवाब

गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के सभी हमलों का चुन चुनकर जवाब देंगे। शाह इस दौरान सीएए के पक्ष में सरकार के अडिग रहने का भी सीधा संदेश देंगे। दरअसल, लोगों को भड़काने के मामले में अब तक आप के वर्तमान तो कांग्रेस के पूर्व पार्षद की गिरफ्तारी हुई है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस की जांच में भी लोगों को भड़काने से संबंधित कई तथ्य सामने आए हैं। ऐसे में शाह विपक्ष पर सीधा निशान साधेंगे।

आपत्तिजनक बयान देने वालों पर कार्रवाई नहीं

सूत्रों के मुताबिक सरकार या पार्टी मंत्रियों-नेताओं के आपत्तिजनक बयान के मामले में फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं करेगी। गौरतलब है कि विपक्ष दिल्ली विधानसभा चुनाव में मंत्री अनुराग ठाकुर, सांसद प्रवेश वर्मा के भड़काऊ बयान को मुद्दा बना रहा है।





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