Delhi Violence: Delhi Police Doubted On Illegal Bangladeshi Immigrants For Riots – क्या बांग्लादेश से जुड़े हैं दिल्ली हिंसा के तार, पुलिस खोज रही है कनेक्शन!

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अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 02 Mar 2020 07:24 PM IST

पूर्वी दिल्ली के खुरेजी में रहमानी मस्जिद के पास बाड़ लगाकर अपने इलाकों की रक्षा करते स्थानीय नागरिक

पूर्वी दिल्ली के खुरेजी में रहमानी मस्जिद के पास बाड़ लगाकर अपने इलाकों की रक्षा करते स्थानीय नागरिक
– फोटो : AmarUjala

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सार

  • पुलिस को परेशान कर रहा ये सवाल- उत्तर-पूर्वी इलाका ही क्यों रहा हिंसा का केंद्र 
  • उत्तरी-पूर्वी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली के इलाकों में भारी संख्या में रहते हैं अवैध बांग्लादेशी नागरिक

विस्तार

दिल्ली हिंसा के पीछे पुलिस बांग्लादेशी कनेक्शन खंगाल रही है। उसे आशंका है कि दिल्ली में हुई भयानक हिंसा में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों का हाथ हो सकता है। इस एंगल को ध्यान में रखते हुए पुलिस पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और दिल्ली से सटे यूपी के इलाकों जैसे लोनी, गाजियाबाद और नोएडा के आपराधिक छवि के बांग्लादेशी नागरिकों की प्रोफाइल चेक कर रही है।

घटना वाले दिनों में इनकी उपस्थिति किन-किन एरिया में रही है, इसके बारे में बारीकी से जांच की जा रही है। हिंसा के बाद अचानक गायब हुए लोगों की भी बारीकी से जांच हो रही है। हिंसा के दौरान स्थानीय लोगों ने भारी संख्या में वीडियो रिकॉर्ड किए हैं। इन वीडियोज से भी दिल्ली पुलिस संदिग्ध अपराधियों की तलाश कर रही है।

क्यों हुआ शक

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक, राजधानी में नागरिकता कानून के विरोध में दर्जनों जगहों पर प्रदर्शन चल रहे थे। शाहीन बाग इन प्रदर्शनों का केंद्र था। जामिया, जामा मस्जिद से लेकर तुगलकाबाद जैसी अनेक जगहों पर प्रदर्शन चल रहे थे। लेकिन पूरी राजधानी में कहीं भी प्रदर्शन हिंसक नहीं हुआ।

फिर ऐसा क्या था कि हिंसा उत्तर-पूर्वी इलाके में ही फैली, पुलिस इस एंगल पर बारीकी से जांच कर रही है। इसके अलावा, नागरिकता कानून का सीधा असर अगर किसी पर पड़ना है तो वह बांग्लादेश के नागरिक ही हैं।

ऐसे में माना जा रहा है कि यह वर्ग सरकार के प्रति अपना गुस्सा निकालने से खुद को रोक न पाया हो और हिंसक हो गया हो। पुलिस इस कोण को ध्यान में रखते हुए एक-एक बांग्लादेशी नागरिक की पहचान कर रही है।

बांग्लादेशी नागरिकों का गढ़ है यह एरिया

बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए पूर्वी, उत्तर-पूर्वी दिल्ली के इलाके सबसे ज्यादा मुफीद हैं। इसका कारण यह है कि यहां आज भी दो-तीन हजार रुपये में किराए पर रहने की जगह मिल जाती है।

यूपी-बिहार से आने वाले मजदूरों के साथ-साथ अवैध बांग्लादेशी नागरिक भी इसी एरिया में सबसे ज्यादा संख्या में रहते हैं। इनमें से ज्यादातर महिलाएं घरों में साफ-सफाई का कामकाज करती हैं, जबकि पुरुष दिहाड़ी मजदूरी, कबाड़ी, सिलाई-कढ़ाई या छोटे-मोटे कामकाज करते हैं।

अपराधी भी ज्यादा

दिल्ली और एनसीआर एरिया में हो रहे अपराधों में बांग्लादेशी अपराधियों की अच्छी खासी भूमिका समय-समय पर सामने आती रही है। राजधानी के छोटे-मोटे अपराधों के साथ-साथ हत्या और लूटपाट जैसे गंभीर मामलों में भी इनकी भूमिका सामने आती रही है।

वारदातों को अंजाम देकर कई बार ये बांग्लादेश वापस भी भाग जाते हैं, जिससे इन्हें पकड़ पाना पुलिस के लिए मुश्किल हो जाता है। लेकिन इसके बाद भी भारी संख्या में अपराधी पुलिस की पकड़ में आ जाते हैं और इन पर केस भी चले हैं। दिल्ली हिंसा में बांग्लादेशी अपराधियों की क्या भूमिका रही है, पुलिस अब इसकी जांच कर रही है।

 





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